एटा। चुनावी वादे को पूरा करते हुए सरकार ने कर्ज माफी तो दे दी, लेकिन अन्नदाता अब एनओसी के लिए भटक रहे हैं। आलम यह है कि किसानों के पास ऋण मोचन का प्रमाण पत्र तो पहुंच गया है, लेकिन अब नो-ड्यूज प्रमाण पत्र के लिए किसान बैंक के चक्कर काट रहे हैं।
इसके साथ ही तमाम ऐसे किसानों को योजना का लाभ दे दिया है, जिनका ऋण कुछ पैसों या कुछ सैकड़ों रुपये में है। आंकड़ों की बाजीगरी में विभाग और प्रशासन ने भले ही बाजी मार ली हो, लेकिन सैकड़ों किसान ऋण माफी से दूर हैं।
केस नंबर एक
जलेसर क्षेत्र के गांव कल्याणपुर जुनाबली निवासी वीरपाल लाखा ने तीन साल पहले जिला सहकारी बैंक शाखा अवागढ़ से 30 हजार रुपये का ऋण लिया था। ब्याज को जोड़े जाने के बाद ऋण की कुल रकम 47 हजार रुपये हो गई। ऋण मोचन योजना में वीरपाल को लाभ तो मिल गया। प्रमाण पत्र भी मिल चुका है, लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिली।
केस नंबर दो
गांव नगला बख्ती निवासी सुभाष चंद्र ने केनरा बैंक अवागढ़ से ढाई लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण मोचन योजना में किसान सुभाष को एक लाख रुपये की कर्ज माफी का लाभ तो मिल गया, लेकिन अब तक एनओसी नहीं मिली। बैंक ने दो-चार दिन बाद आकर एनओसी लेने के लिए कहा है।
निर्देशों में साफ नहीं की गई थी न्यूनतम राशि
जिले में सैकड़ों किसानाें के छोटी रकम के ऋण माफ हो गए। जिन किसानों ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में ऋण की रकम को जमा कर दिया था, तो उनके खाते में शेष जमा को रकम अगर एक लाख से कम थी, तो उसे भी ऋण माफी के दायरे में मान लिया गया।
ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त के अधिकारी प्रखर टंडन कहते हैं कि सरकार की ओर कर्ज माफी के लिए अधिकतम राशि तो एक लाख रुपये तय की गई थी, लेकिन न्यूनतम राशि तय नहीं की गई। इसके चलते जिन खातों में एक लाख से कम जो भी ऋण बकाया था, उसे माफ कर दिया गया।
सत्यापन में हुई अनदेखी
किसानों को छोटी रकम पर ऋण मोचन का लाभ मिलने के पीछे सत्यापन को भी कारण माना जा रहा है। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि सत्यापन के दौरान सही से काम नहीं होने से तमाम किसान अनुचित लाभ पा गए।
ये हैं आंकड़ें
63 हजार किसानों को किया जाना है लाभान्वित
21574 किसानों को पहले चरण मेें मिल चुका लाभ
450 करोड़ रुपये होंगे योजना पर खर्च
150 करोड़ रुपये पहले चरण में मिले
19086 किसानों का आधार कार्ड नहीं हुआ है लिंक
32 हजार किसान होंगे दूसरे चरण में लाभान्वित