मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों का हाल बेहाल है। शिक्षा की गुणवत्ता खराब है। बच्चों को हिंदी और गणित तक का ज्ञान नहीं है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गनेशपुरा में मानक से अधिक शिक्षकों की स्कूलों में तैनाती है। परिषदीय स्कूलों के निरीक्षण के दौरान डीएम ने एक प्रधानाध्यापिका तथा एक शिक्षिका का वेतन रोकने के आदेश दिए हैं।
डीएम यशवंत राव बुधवार को परिषदीय स्कूलों का हाल जाना। पूर्व माध्यमिक विद्यालय कछपुरा के कक्षा आठ के छात्र प, फ, त, थ में अंतर, चार का वर्गमूल भी नहीं बता सके। कक्षा पांच के बच्चे ठीक प्रकार से हिंदी की किताब भी नहीं पढ़ सके। कई बच्चों को नौ का पहाड़ा याद नहीं था।
प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर में कक्षा तीन का छात्र तो दो का पहाड़ा भी नहीं सुना सका। प्राथमिक विद्यालय कछपुरा में कक्षा पांच की छात्रा गोल्डी तो फल और सब्जियों के नाम अंग्रेजी में नहीं बता सके। शिक्षा के खराब स्तर पर डीएम ने नाराजगी जताई। शिक्षकों से कहा कि बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें।
उनकों हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित का सही ज्ञान होना चाहिये। प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर में प्रधानाध्यापिका पूनम भदौरिया 10.55 बजे, शिक्षिका सुमनलता 10.30 बजे भ्रमण रजिस्टर पर आवश्यक कार्य से मुख्यालय जाना दर्ज कर विद्यालय से चली गईं थीं। सहायक अध्यापिका कोई संतोषजनक जबाव नहीं दे सकीं। डीएम ने दोनों का एक दिन का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश दिए।
विद्यालय के बालक शौचालय में लकड़िया भरी थीं जबकि बालिका शौचालय में गंदगी थी। दोनों में ताला बंद था। आंगनवाडी केंद्र गनेशपुर में 50 बच्चों के सापेक्ष केवल पांच बच्चे मिले। एएनएम श्रीदेवी के गांव में न आने से 21 जून के बाद किसी महिला का टीकाकरण नहीं हुआ है।
डीएम ने एएनएम के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश सीएमओ को दिए। प्राथमिक विद्यालय कछपुरा में ड्रेस उपलब्ध नहीं कराई गई है। एमडीएम में बनी तहरी की गुणवत्ता ठीक नहीं मिली। पूर्व माध्यमिक विद्यालय गनेशपुरा में 137 छात्रों के लिए छह शिक्षक, दो अनुदेशक तैनात हैं।
जिनको प्रतिमाह 3.50 लाख रुपया वेतन दिया जा रहा है। शिक्षा के स्तर में कोई सुधार नहीं है। विद्यालय में मानक से ज्यादा शिक्षक कैसे तैनात किए गए हैँ इस पर बीएसए को कारण स्पष्ट करने को कहा है।