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द्रोणाचार्य के बिना कैसे बनें एकलव्य और ध्यानचंद्र

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द्रोणाचार्य के बिना कैसे बने एकलव्य और ध्यानचंद्र - फोटो : अमर उजाला
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एटा। बिना द्रोणाचार्य के कोई खिलाड़ी एकलव्य नहीं बन सकता। ऐसा ही कुछ एटा में भी देखने को मिल रहा है जहां पर एकलव्य तो बहुत हैं लेकिन द्रोणाचार्य की कमी है। कोच के अभाव में खिलाड़ियों के सपने तो टूट ही रहे हैं उनमें छुपी प्रतिभा खत्म होती जा रही है। एटा में कोच नहीं हैं तो कासगंज में संसाधनों के अभाव में खिलाड़ियों को प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा है।
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ओलंपिक की बात करें तो हमारे जहन में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद्र समेत पीवी संधू, साक्षी मलिक, सायना नेहवाल, लिएंडर पेस, अभिनव बिंद्रा को हमेशा याद किया जा जाएगा। यह सभी खेल के बेहतरीन वातावरण में अभ्यास करके यहां तक पहुंचे हैं लेकिन एटा में खेलों का बुरा हाल है। स्टेडियम में सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं।
इमारत दरक चुकी है, मैदान अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। क्रिकेट, भारोतोलन, वालीबाल के लिए प्रशिक्षक तैनात हैं, लेकिन हाकी, बैडमिंटन, एथलेटिक्स, शूटिंग, कुश्ती, टेनिस आदि खेलों के कोच ही नहीं न ही इनके खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा हैं। सुविधाओं के अभाव में ओलंपिक से जुड़े खेलों में खिलाड़ी बेहतर नहीं कर पाते।
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स्टेडियम में खेल विभाग में विभिन्न खेलों में अभी तक सिर्फ 105 खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। पंजीकृत में 42 क्रिकेट, 30 भारोत्तोलन और 33 बालीवाल के खिलाड़ी हैं। अन्य खेलों में पंजीकरण ही नहीं है।
युवा खेल विभाग के जलेसर, निधौली, सकीट में स्टेडियम हैं और तीनों बदहाल हालत हैं। बीस लाख से अधिक की आबादी वाले जिले में सिर्फ दो खिलाड़ियों को खेलकूद विभाग से 20-20 हजार रुपये स्कालरशिप मिलती है और दोनो ही खिलाड़ी जिले से बाहर जा चुके हैं।
इन बाक्स को जरूर तो लगाएं
बैडमिंटन
स्टेडियम में बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए कोर्ट है। खिलाड़ी खेलते हैं, लेकिन पंजीकरण शून्य है। कोर्ट में नेट टूटा है। प्रशिक्षक नहीं होने से खिलाड़ी करियर को लेकर पहल नहीं करते दिखाई देते हैं।

एथलेटिक्स
दौड़, कूद, अन्य खेलों के लिए पायका के तीनों स्टेडियम का हाल बेहद खराब है। जिले के किसी भी एथलीट का पंजीकरण नहीं है।

कुश्ती
जिले में पहलवानी और कुश्ती के शौकीनों की संख्या कम नहीं है, लेकिन जिले में एक भी पहलवान का पंजीकरण नहीं है। स्टेडियम में कुश्ती के लिए न तो कोई सुविधा है और न ही कोई ग्राउंड।

हॉकी
जिला खेल विभाग हर साल राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हॉकी प्रतियोगिता कराता है, लेकिन जिले में एक भी खिलाड़ी पंजीकृत हॉकी टीम नहीं है। स्टेडियम में व्यवस्थाएं नहीं।
फुटबॉल
जिले में फुटबाल को लेकर खिलाड़ियों में खासा रुझान है। जिला फुटबाल संघ की बदौलत जिले की टीम ने सैफई तक सुब्रतो कप में डंका बजाया है।
बास्केटबाल और जिम बदहाल
स्टेडियम के बास्केटबाल कोर्ट में लगे पोल से बास्केट गायब है। स्टेडियम के जिम में हालात खराब हैं। गेट टूटा है। मशीनें काम नहीं करती हैं। जिम प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ियों को परेशान रहते हैं।

कहते हैं अधिकारी
जिले में स्टेडियम में व्यवस्थाओं को लेकर शासन को पत्र लिखा है। लखनऊ में चल रहे कोच ट्रायल के बाद हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स के प्रशिक्षक मिलने की उम्मीद है।
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रियाजुद्दीन, जिला क्रीड़ा अधिकारी
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