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झोलाछाप कर रहे इलाज, नहीं रुक रहा मौत का ग्राफ

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मैनपुरी। जिले में झोलाछाप हर मर्ज का इलाज कर रहे हैं। इससे मरीजों की जान भी जा रही है और स्वास्थ्य विभाग अनजान बना हुआ है। हर साल तीन से चार मरीजों की झोलाछाप के इलाज से मौत हो रही है।
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जिले में एक-दो नहीं बल्कि शहर, कस्बों में 400 से अधिक झोलाछाप क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। वहीं निजी क्लीनिक भी 200 हैं जबकि सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण सिर्फ 26 का ही है।

रविवार की रात नगला किसी निवासी अफजल के पुत्र फरमान की कस्बा घिरोर में झोलाछाप के उपचार के बाद मौत हो गई थी। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। केवल अफजल ही नहीं जिले में झोलाछाप के उपचार से हर साल तीन से चार मरीजों की मौत होती है।
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स्वास्थ्य विभाग हर बार जब कोई घटना हो जाती है तभी अभियान चलाता है और फिर पूरे साल इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। यही कारण है कि जिले में झोलाछाप की संख्या बढ़ती जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो जिले में 400 से अधिक झोलाछाप हैं। जो गांव-गांव, गली-गली निजी क्लीनिक के जरिए लोगों को उपचार दे रहे हैं। 200 से अधिक निजी क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, लेकिन सीएमओ कार्यालय में मात्र 26 क्लीनिक का ही पंजीकरण है। जबकि केवल शहर में ही 30 से अधिक क्लीनिकों का संचालन किया जा रहा है। जिन 26 निजी क्लीनिकों का पंजीकरण है। उनमें से भी एक दर्जन क्लीनिक ऐसे हैं, जिनका पंजीकरण तो किसी रोग विशेषज्ञ के नाम से है और उनका संचालन फार्मासिस्ट कर रहे हैं।

पूर्व में भी होती रही हैं मौत
- वर्ष 2015 में नगर के आगरा रोड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के सामने स्थित एक प्रसूता की में झोलाछाप से प्रसव कराते समय मौत हो गई थी।

- वर्ष 2012 में नगर के कचहरी रोड स्थित एक अवैध क्लीनिक पर गर्भपात कराते समय एक महिला की मौत हुई थी।

- दिसंबर 2017 में भोगांव में एक बालिका की झोलाछाप के उपचार से मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो हर साल तीन से चार मरीजों की झोलाछाप के उपचार से मौत हो रही हैं।

तीन क्लीनिक हुए थे सील, फिर से शुरू
स्वास्थ्य विभाग की ओर से छह माह पहले झोलाछाप को लेकर छापामार कार्रवाई की गई थी। इस दौरान तीन क्लीनिक सील किए थे, लेकिन बाद में उनका संचालन भी शुरू कर दिया गया। अब विभागीय अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर उनका संचालन पुन: कैसे हुआ।

झोलाछाप को लेकर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। पूर्व में कई क्लीनिक सील किए गए हैं। शीघ्र ही जिले में फिर से झोलाछापों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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- डा. राकेश कुमार, डिप्टी सीएमओ
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