मथुरा। टैंक चौराहे से लेकर टाउनशिप तक करीब ढाई करोड़ की लागत से लगीं एलईडी छह महीने में ही धड़ाम में हो गईं हैं। पचास से ज्यादा पोल से तो एलईडी गायब हो चुकी हैं जबकि चालीस पोल की लाइटें खराब हो गईं हैं। अब एलईडी की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारी खामोश हैं।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने मथुरा आगरा मार्ग को रोशन करने के लिए एलईडी लाइटें लगवाईं थीं। टैंक चौराहे से टाउनशिप तक 137 पोल लगाए गए। एक पोल की लागत करीब 60 हजार है। एक एलईडी की कीमत 14 हजार के करीब है। अप्रैल 2017 में इन लाइटों को लगवाया गया था। जिस वक्त लाइटें लगीं थीं तो पूरा मार्ग रोशन हो गया था। रात में भी दिन जैसा उजियारा नजर आता था। लेकिन यह रौनक ज्यादा दिन नहीं रह सकी। कुछ ही दिनों में लाइटें जवाब देने लगी थीं। अब हालात यह हैं कि आधे से ज्यादा एलईडी खराब हो गईं हैं। पचास से भी अधिक पोल ऐसे हैं जिन पर एलईडी अब हैं ही नहीं। यह एलईडी कहां चली गईं हैं किसी को नहीं पता।
ढाई करोड़ की लागत से लगवाई गईं इन लाइटों को कोई देखने वाला नहीं है। स्थिति यह है कि टैंक चौराहे से टाउनशिप पर रात के वक्त फिर अंधेरा रहने लगा है। बताया जाता है कि बड़ी मात्रा में लाइटों को चोरी कर लिया गया है। लेकिन प्राधिकरण या किसी ठेकेदार ने एक बार बी एलईडी चोरी होने की रिपोर्ट नहीं लिखवाई है। प्राधिकरण के सचिव रविंद्र कुमार का कहना है कि लाइटें ठीक हैं। अगर ऐसा है तो वह चेक कराया जाएगा।