मथुरा। सोशल मीडिया पर बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा के नाम से एक फर्जी आदेश वायरल हो गया। इसके मुताबिक शिक्षामित्रों का मानदेय मुख्यमंत्री द्वारा 17 हजार कर दिया गया। इस पत्र के वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग, शिक्षामित्रों में हड़कंप मच गया। देर शाम आदेश की तस्दीक की गई तो वो फर्जी निकला। उधर, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने भी पत्र का खंडन करते हुए उसे फर्जी बताया।
इस फर्जी आदेश में प्रदेश के सभी बीएसए को सात दिन के अंदर शिक्षामित्रों को उनके मूल पद पर ज्वाइन कराने के आदेश दिए गए, अन्यथा की स्थिति में उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त करने की बात कही गई। ये पत्र प्राइमरी मास्टर डॉट कॉम वेबसाइट पर वायरल हुआ।
इसके बाद फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर आया तो शिक्षामित्र एक दूसरे से पूछताछ करने लगे। देखते ही देखते बीएसए कार्यालय में भी फोन आने लगे। शिक्षामित्र एसोसिएशन के अध्यक्ष खेम सिंह, गोवर्धन ब्लॉक अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने बताया लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष से बात होने के बाद पता चला कि ये आदेश फर्जी है। इससे बेवजह भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
‘सचिव के हस्ताक्षर से जो आदेश जारी हुआ है वो फर्जी है। इसमें डिस्पैच नंबर भी गलत है चूंकि इससे आगे के नंबर के आदेश कार्यालय आ चुके है, ऐसा कोई आदेश हमारी मेल पर भी नहीं है।’
गिरिराज सिंह, प्रभारी बीएसए मथुरा