एटा। जिले के करीब 70 हजार किसान खरीफ फसल बोने के बाद भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। बैंकों ने इन किसानों को एनपीए घोषित कर दिया है। ऐसे में न तो उन्हें बैंक से फसली ऋण मिला है और न ही फसल बीमा का प्रीमियम कट रहा है। इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा लाभ सिर्फ नया ऋण लेने वाले किसानों और पुराने लोन की किस्त समय पर जमा करने वाले किसानों को ही मिलेगा।
जिले में करीब 2.17 लाख किसान में से 1.15 लाख पंजीकृत हैं। इनमें से 1.75 लाख किसानों ने केसीसी से विभिन्न बैंक शाखाओं से फसली ऋण ले रखा है। लेकिन कर्ज नहीं चुकाने के कारण बैंकों ने 70 हजार से अधिक किसानों को एनपीए घोषित कर दिया। एनपीए किसानों के पहले से ही कर्ज में डूबने और ऋण नहीं चुकाने पर बैंकों ने इस बार फसली ऋण ही नहीं दिया है।
ऐसे में नया नहीं मिलने और पुराना लोन नहीं चुकाने से खरीफ की फसल बोने के बाद भी इन किसानों को प्रधानमंत्री बीमा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। लीड बैंक के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार जिले की बैंकों ने 62 किसानों को ही फसली ऋण जारी किए हैं। इनमे वे किसान शामिल हैं जिन्होंने खरीफ फसल के लिए नया ऋण लेने के साथ पुराने ऋण की किस्त का बैकों में समय पर भुगतान कर रहे हैं।
जनसेवा केंद्र में फसल बीमा कराएं
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर विजय शंकर यादव ने बताया कि जिन किसानों ने बैंक से कृषि ऋण नहीं लिया है वे किसान सीधे जनसेवा केंद्र में जाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत पंजीकरण कराने के बाद प्रीमियम जमा कर सकते हैं। जन सेवा केंद्र में सिर्फ बिना फसली ऋण के फसल बोने वाले किसान बीमा करा सकते हैं।
फसल बीमा योजना के प्रचार में कमी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए इस बार जिले में यूनीवर्सल सोम्यो जनरल इंश्योरेंस को अधिकृत किया गया है। लेकिन इस कंपनी का ब्रांच मैनेजर इटावा में बैठता है। ब्रांच मैनेजर से फोन पर संपर्क किया तो दोपहर बाद फोन उठा। बोले मेरा एक सदस्य इलाहाबाद बैक में बैठता है। जब उस सदस्य का फोन नंबर मांगा तो ब्रांच मैनेजर को फोन नंबर भी पता नहीं था।