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जांच में खुलासा स्वकर के नाम पर हुई लूट

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जांच - फोटो : demopic
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फिरोजाबाद। पालिका से निगम का दर्जा मिलने के बाद निगम के अफसरों और कर्मचारियों ने स्वकर के नाम पर जमकर लूट की। सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट डीएम को भेजते हुए निगम को भ्रष्टाचार के लिए पूरी तरह दोषी ठहराया है।
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चार अगस्त 2014 को शासन ने नगर पालिका को उच्चीकृत करते हुए नगर निगम का दर्जा दिया। निगम की घोषणा होते ही बोर्ड समाप्त कर दिया गया। प्रशासक के रूप में नगर आयुक्त रामऔतार रमन के संरक्षण में अधिकारी, कर्मचारियों ने स्वकर के नाम पर जनता से अवैध वसूली शुरू कर दी।

लोक नागरिक कल्याण समिति द्वारा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया। आंदोलन को दबाने के लिए निगम ने सचिव सतेंद्र जैन सौली के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ, न्याय एवं विधि राज्य मंत्री के निर्देश पर डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की।
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सिटी मजिस्ट्रेट शीतला प्रसाद ने डीएम को भेजी जांच रिपोर्ट में नगर निगम को भ्रष्टाचार की जांच में दोषी ठहराया है। बिना टेंडर के मकानों पर नंबर प्लेट डालने का ठेका देने को भी कमेटी ने गलत पाया।


लोक नागरिक कल्याण समिति के सचिव सतेंद्र जैन सौली ने कहा है कि नगर निगम अधिकारियों ने भ्रष्टाचार को छिपाने के तमाम हथकंडे अपनाए लेकिन सच्चाई जनता के सामने आ गई। समिति पदाधिकारियों ने प्रभारी नगर आयुक्त सहित दोषी अधिकारियों को निलंबित करने, एफआईआर दर्ज कराकर गिरफ्तारी की मांग की है। अमित गुप्ता, डा. डीपीएस राठौर, डा. सुभाष जिैन, दिनेश जैन, उल्लास गर्ग, रामदास मानव, विकास पालीवाल मौजूद रहे।

प्रभारी नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने कहा कि ेस्वकर की जांच के मामले में सिटी मजिस्ट्रेट ने डीएम को क्या रिपोर्ट भेजी गई है, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद भी कुछ कहना संभव होगा।
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