एटा। गर्भवती महिलाएं एनीमिया से उभर नहीं पा रही है। सरकार द्वारा महिलाओं को पोषण देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं धराशायी हो रही है। जांच में आ रहे आंकड़े आज भी चिंताजनक हैं। हर माह सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एनीमिया की शिकार हो रही है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत गर्भवती महिलाओं में होने वाली एनीमिया को रोकने के लिए आशा के माध्यम से लाल रंग की आयरन गोलियां खाने के लिए दी जाती है। साथ ही डीपीओ के माध्यम से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों से सरकार द्वारा दिए जाने वाले पोषण को भी बांटा जाता है। मगर इसके बावजूद भी जिले में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया चिंताजनक बनी हुई है। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात डीएल से कम है। उनकी संख्या नवंबर तक 1915 पहुंच गई है। अगर प्रतिमाह के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अगस्त में सबसे ज्यादा 425 महिलाओं में एनीमिया पाया गया। जिला कार्यक्रम मैनेजर स्वास्थ्य डा. मोहम्मद आरिफ का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को पोषण की आवश्यकता होती है। आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार पुष्टाहार उपलब्ध करा रही है। कहीं न कहीं चूक हो रही है जिसकी वजह से महिलाओं में एनीमिया की संख्या कम नहीं हो पा रही है।
प्रतिमाह आंकड़ों में एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाएं
अप्रैल 129
मई 143
जून 217
जुलाई 368
अगस्त 425
सितंबर 393
अक्तूबर 133
नवंबर 107
कुल 1925