फिरोजाबाद। 1984 में सिख समाज के लोगों को कत्लेआम के मामले में दंगाइयों की दिल्ली हाईकोर्ट के सजा बरकरार रखे जाने की शहर के सिख समाज ने सराहना की। समाज के लोगों ने कहा कि न्यायालय के फैसले से लगा कि देश में कानून का राज है।
देश में 1984 में हुए दंगे के दौरान सुहागनगरी में भी कई दुकानों को जलाने के साथ ही हमले किए गए थे। लोगों ने छिपकर जान बचाई थी। पुरानी यादों को सुनकर नजारा तो आंखों के सामने दिखाई देने लगता है।
गुरुद्वारा गुरु सिंह की सभा के पूर्व प्रधान सरदार राजेंद्र सिंह मल्होत्रा कहते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने दंगा के सभी आरोपियों की सजा बरकरार रखकर अच्छा काम किया है। गलती करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। सुहागनगरी में तीन सौ लोगों की तो हत्या हुई थी। हम न्यायालय के साथ सरकार के आभारी हैं कि न्याय दिलाने की पहल की।
समाजसेवी गुरुचरन सिंह सलूजा ने कहा दंगा हो या फिर कोई और मामला दोषी चाहे कोई हो सजा तो मिलनी चाहिए। न्यायालय का फैसला मेरे लिए स्वागत योग्य है। उस समय मानवता को लोग भूल गए थे। जो कुछ हुआ था वह तो गलत था।
गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा प्रबंधन कमेटी के प्रधान हरवंश सिंह मल्होत्रा ने कहा कि देर से सही लेकिन न्याय हुआ। समाज के व्यक्तियों को यह महसूस हुआ की देश में कानून का राज है। जिन दंगाइयों ने गलत किया उनको दंड मिलना चाहिए। सिक्ख समाज इस फैसले स्वागत करता है, सिख समाज यह समझेगा कि हमें जीने का हक है।