हिंदू रीति रिवाज से शादी करते विदेशी जोड़े
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वृंदावन (मथुरा)। भारतीयता का असर और वैदिक रीति रिवाज विदेशी लोगों को भी भाने लगी है। हिंदू रीति रिवाजों से वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य रविवार को दो विदेशी जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। दोनों जोड़े भारतीय वेशभूषा में सजे थे। वृंदावन के भूत गली स्थित वृंदा कुंज में इस विवाह का आयोजन किया।
बंगलुरु के पंडित महाकाल और दक्षिण अमेरिका के आंदेर के आचार्यत्व में गोधूलि बेला में कोलंबिया निवासी मोहनवंशी दास और ब्रह्म संहिता के साथ पेरू निवासी मुकुंद माधवदास ने जापान निवासी केशीघाट देवीदासी के साथ अग्नि को साक्षी मान सात जन्मों तक साथ निभाने का वचन लिया।
कन्यादान की रस्में उनके वृंदा कुंज के परमद्वैतयी और वृंदावन चंद्र ने निभाईं। विदेशी भक्तों ने फूल बरसाकर दोनों को आशीर्वाद दिया। पत्रकारों से बातचीत में दूल्हा-दुल्हन ने कहा कि भारतीय संस्कृति हकीकत में ही दुनिया की अन्य संस्कृतियों की अपेक्षा श्रेष्ठ है। कार्तिक मास में वह यहां आए और यहां की संस्कृति और सभ्यता के कायल हो गए।
मोहनवंशी दास ने बताया कि वह बचपन से ही भगवान कृष्ण के भक्त रहे हैं। गीता का भी वह नियमित पाठ करते हैं। भगवान कृष्ण को ही अपना इष्ट मानते हैं। इस शादी के अमेरिका, कनाडा, रूस आदि देशों के कई विदेशी भी साक्षी बने।
भारतीय आकर्षण खींच लाया
वृंदावन। भारतीय संस्कृति का ही आकर्षण है जो विदेशी युगलों को वृंदावन तक खींच लाया। मुकुंद माधवदास ने कहा कि उन्होंने और केशीघाट देवीदासी ने भारतीय और हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करने का फैसला किया और आज दोनों वैवाहिक बंधन में बंधे है।