मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों में पहले शिक्षकों ने शिक्षण कार्य नहीं कराया। अब परीक्षा की बारी आई तो शिक्षक छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। शुक्रवार से शुरू हुई परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं को किताबों के साथ परीक्षाएं देते देखा गया।
परिषदीय स्कूलों की सत्र परीक्षाएं शुक्रवार से शुरू हो गईं। सात सितंबर तक चलने वाली परीक्षाओं के पहले दिन परीक्षा में नकल का खेल चला। भले ही छात्र-छात्राओं के प्रश्नपत्र बोर्ड पर लिखने की बात कही गई हो, लेकिन यहां तो किताबें रखकर प्रश्र हल कराए गए।
परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की परीक्षाएं देखकर लग नहीं रहा था कि सत्र परीक्षाएं हो रही हैं। परीक्षा में छात्र-छात्राओं ने अपनी किताबों की मदद से प्रश्न हल किए। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विभाग के निर्देश पर शुरू कराई गई परीक्षा का जमकर मजाक बनाया।
शुक्रवार को पहले दिन प्रथम पाली में 8:30 से 10:30 बजे तक कक्षा दो से लेकर आठ तक हिंदी की लिखित परीक्षा हुई। कक्षा एक में हिंदी मौखिक परीक्षा हुई। कक्षा दो से पांच तक द्वितीय पाली में 11 से एक बजे तक हिंदी की मौखिक परीक्षा हुई।
परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों ने अप्रैल से लेकर अभीतक छात्र-छात्राओं को ढंग से पढ़ाया नहीं। इसका नतीजा है कि अब शिक्षक छात्र-छात्राओं को नकल करा रहे हैं। इससे उनका भविष्य खतरे में हैं।
छात्र-छात्राओं को प्राथमिक स्तर से नकल के लिए प्रेरित करना उनका भविष्य चौपट करने के समान है। विभाग को इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो छात्र-छात्राओं की नकल की आदत पड़ जाएगी।