कासगंज। जनपद के सौ गांव हर वर्ष बाढ़ का दंश झेलते हैं। हर वर्ष बड़े बड़े दावे भी किये जाते हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। लेकिन इस समस्या से निबटने के लिए कोई प्रभावी इंतजाम नहीं किये गये। इसे निपटने के लिए करीब दस वर्षों से यहां बांध बनाये जाने के प्रस्ताव शासन में लंबित हैं। किसी भी सरकार और जनप्रतिनिधि ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों का दर्द समझना भी उचित नहीं समझा। अगर ऐसा होता तो मात्र धन आवंटन के लिए रुके पड़े यह प्रस्ताव अब तक पास हो चुके होते। लोग अब भी यही उम्मीद लगाए हैं कि काश यह सरकार इन प्रस्तावों के लिए धन आवंटित कर दे और बांध बन सके।
जनपद को आखिर बाढ़ त्रासदी से जुड़े प्रस्तावों को अभी तक धन क्यों नहीं मिल रहा। जन प्रतिनिधियों के पास भी इसका जवाब नहीं हैं। गंगा नदी के दाहिने किनारे पर ग्राम बड़ौदा से दतलाना तक ग्राम बघेला, खड़ेरी, लहरा, कादरवाड़ी, घटिया, बनुपुर सहित अन्य गांव की आबादी एवं कृषि भूमि को बाढ़ सुरक्षा प्रदान करने हेतु 15.4 किलोमीटर लंबाई का तटबंध निर्माण योजना का प्रस्ताव 15 करोड़ 64 लाख रुपये का लंबित है। इसके अलावा समसपुर, नरदौली तटबंध का प्रस्ताव समसपुर से नरदौली तक 21.06 किलोमीटर की लंबाई का प्रस्ताव 16.21 करोड़ लाख रुपये का लंबित है। यह दोनों ही प्रस्ताव प्रदेश की बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति के द्वारा स्वीकृत हैं। इसके बावजूद धन आवंटन नहीं हुआ। यदि यह दोनों बांध बन जाएं तो प्रभावित गांव को बाढ़ से सुरक्षा मिल जाए।
- बांध निर्माण के प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित हैं। मॉडल स्टडी के लिए तकनीकी विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। जिससे बांध निर्माण की क्रियाशीलता के बारे में अध्ययन होगा। इसी के साथ ही सरकार निर्माण के लिए धन अवमुक्त करेगी। एक अन्य बांध का निर्माण तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर रुका हुआ था जिसके लिए पत्र लिखकर शासन से निर्माण पूरा कराने के लिए सुझाव दिया था। यह सुझाव सरकार ने स्वीकार कर लिया है। - आरपी सिंह, जिलाधिकारी
- बांध निर्माण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विधानसभा में भी बंाध निर्माण के लिए चर्चा हुई थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारण से अभी धन आंवटित नहीं हुआ है। धन आवंटन के लिए कोशिश की जा रही है। शीघ्र ही समस्या का समाधान होगा। - ममतेश शाक्य, विधायक, पटियाली।