मैनपुरी। जनपद में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी शासनादेश की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शासन और अधिकारियों के आदेश के बाद भी डाक्टर स्वास्थ्य केंद्र पर समय से नहीं पहुंच रहे हैं।
अधिकारियों द्वारा किए जा रहे निरीक्षण में इस बात का खुलासा हो रहा है। प्रभारी सीएमओ के निरीक्षण में पीएचसी सुल्तानगंज में प्रभारी चिकित्साधिकारी सहित छह कर्मचारी अनुपस्थित मिले।
वहीं सीएचसी कुरावली में लंबे समय से चौकीदार अनुपस्थित मिला। सभी के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रभारी सीएमओ ने लिखा है। प्रभारी सीएमओ डॉ. सीएम यादव शनिवार को एसीएमओ आरसीएच डा. जेपी शुक्ला के साथ निरीक्षण पर निकले।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुल्तानगंज के निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेपी वर्मा के साथ आधा दर्जन अन्य कार्मिक एवं अधिकारी अनुपस्थित मिले। एलएचवी पुष्पा देवी हस्ताक्षर कर गायब मिलीं।
उनके हस्ताक्षर भी मिलान नहीं खा रहे थे। उन्हें अनुपस्थति माना गया। निरीक्षण में पाया गया कि जावित्री देवी एलएचवी का स्थानांतरण होने के बाद भी इनको प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा रिलीव नहीं किया गया है और न ही पंजिका में हस्ताक्षर करने दिए जा रहे हैं।
क्षेत्र की आरबीएस के चिकित्सा दल द्वारा माह मई में ही बच्चों को अभिलेखानुसार एनआरसी में रेफर किया जाना पाया। दल द्वारा बनाया गया रजिस्टर भी संदिग्ध पाया गया जिस पर न तो कोई पेज नंबर था और न ही सक्षम स्तर से प्रमाणित अथवा निरीक्षित किया गया था।
यहां तैनात सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का अनुपस्थित दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुरावली के निरीक्षाण में चौकीदार लंबे समय से अनुपस्थित मिला।
जबकि कार्यरत अभिनव यादव एमपीडब्लू का अवकाश प्रार्थना पत्र बिना हस्ताक्षर के पाया गया, उन्हें अनुपस्थित माना गया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुनेंद्र कुमार को निर्देश दिए गए कि चिकित्सालय की सभी व्यवस्थाएं समुचित रखते हुए सिटीजन चार्टर के अनुसार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएं। वहीं अनुपस्थित कर्मचारियों के संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा।
शासनादेश के तहत ब्लाक खंड स्तर के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 24 घंटे मेडिकल अफसर का होना जरूरी है। शासनादेश के तहत यदि किसी भी क्षेत्र में कोई दुर्घटना घटती है, या फिर झगड़े में कोई घायल होता है तो उसका क्षेत्रीय पीएचसी और सीएचसी पर ही मेडिकल परीक्षण किया जाएगा।
पीएचसी और सीएचसी से डॉक्टर गायब रहते हैं। इसके चलते घायल लोगों को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है।