16 दिसंबर से खरमास शुरू होने से मांगलिक कार्य भी बंद हो जाएंगे। 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास समाप्त हो जाएगा। मगर तीन फरवरी को शुक्र उदय होने के बाद पांच फरवरी से मांगलिक कार्य और विवाह मुहूर्त शुरू होंगे।
पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर 15 दिसंबर को रात दो बजे सूर्य वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु में प्रवेश करेंगे। सूर्य की धनु संक्रांति को खरमास कहा जाता है। मध्यरात्रि के बाद सूर्य का राशि परिवर्तन होने के कारण 16 दिसंबर से खरमास की शुरुआत मानी जाएगी। इसके साथ ही शुक्र अस्त हो गया है। शुक्र अस्तकाल में मांगलिक कार्य निषिद्घ माने गए हैं। इस दौरान करीब 50 दिन विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होंगे। तीन फरवरी से एक बार फिर शहनाई की गूंज सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण उपाध्याय ने बताया कि हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर खरमास का समाप्त हो जाता है। इसके बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। लेकिन इस बार जिस दिन खरमास शुरू हो रहा है, इससे पहले शुक्र अस्त हो चुका है। मांगलिक कार्यों में गुरु और शुक्र अस्त होने का दोष रहता है। इसलिए जब तक शुक्र उदय नहीं होगा, मांगलिक कार्य शुरू नहीं होंगे। पंचागीय गणना के अनुसार दो फरवरी को शुक्र उदय होगा। इसके तीन दिन बाद तक बाल्यत्व दोष रहेगा। इसलिए पांच फरवरी से ही मांगलिक कार्यों के निर्दोष मुहूर्त शुरू होंगे।
धर्म-अध्यात्म के लिए विशेष महीना
सूर्य की धनु संक्रांति को मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं माना जाता है, लेकिन धर्म अध्यात्म की दृष्टि से यह महीना विशेष है। इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठान, भागवत पारायण, धार्मिक यात्रा, दान-पुण्य तथा जप-जपादि करने से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है।