एटा। शहर, कस्बा और ग्रामीण अंचलों में आधे अधूरे मानकाें के साथ स्कूली वाहन सड़क पर दौड़ रहे है। फर्स्ट एड बाक्स खाली होने के साथ ही अग्निशमन उपकरण भी वाहनों में नही है। हादसे होने के बाद भी स्कूल प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
वाहन फीस के नाम पर स्कूल संचालक बच्चों के परिवारीजनों से अच्छीखासी फीस वसूल रहे है। जबकि बच्चों को लाने ले जाने वाले वाहनों की पूरी तरह से मानकों की अनदेखी कर सड़क पर दौड़ाए जा रहे हैं।
इस पर न तो बच्चे के अभिभावक गौर कर रहे है और न ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ध्यान दे रहे हैं। देखा जा रहा है कि अधिकांश स्कूल वाहनों में खिड़की में लगे टूटे हुए शीशे, प्रथम उपचार बाक्स खाली, अग्निशमन उपकरण गायब हो रहे है। इतना ही नहीं स्कूली वाहन खटारा की हालत में बच्चों को बैठाकर इधर से उधर दौड़ रहे हैं।
गैस किट से दौड़ रहे वाहन
प्रतिबंध के बाद भी अधिकांश स्कूल वाहन गैस किट लगाकर सड़क पर स्कूली बच्चों को विद्यालय तक लाते और ले जाते हैं। जबकि पिछले माह जुलाई में गैस से चलने वाली स्कूली वैन रेलवे पुल के पास आग लगने की घटना हो चुकी है। जिसमें सवार बच्चे बाल-बाल झुलसने बच गए थे।
नहीं है वाहनों में फोग लाइट
कोहरे में बचाव के लिए फोग लाइटें भी नहीं लगवाई गई हैं। जबकि पिछले साल जुलाई माह में कोहरे के चलते अलीगंज क्षेत्र में स्कूली बस से हादसा हो चुका है। जिसमें 12 स्कूली बच्चों सहित तेरह लोगों की मौत हो गई थी।