वृंदावन (मथुरा)। करोड़ाें की मालकिन और दो बेटों की एक मां आज दर-दर की ठोकरें खा रही है। जिन बच्चों को उसने पाला-पोसा उन्हीं ने जीवन के अंतिम पड़ाव में उसे घर से निकाल दिया। वृद्धा अपना सिर छिपाने के लिए एक आश्रम में शरण ली लेकिन बेटों ने उसे वहां भी चैन से रहने नहीं दिया। थक हार कर वृद्धा आश्रय पाने के लिए किसी तरह वृंदावन पहुंची है। जहां सामाजिक कार्यकर्ता ने वृद्धा को महिला आश्रय सदन पर भर्ती कराया है।
आगरा की शांति नगर निवासी 78 वर्षीय वृद्धा शांतिदेवी के पति लक्ष्मण सिंह की 2002 में मौत हो गई थी। शांति देवी के दो भी बेटे हैं लेकिन पति के मरते ही दोनों बेटे और बहुएं पारिवारिक कलह करने लगे। धीरे-धीरे मानसिक व शारीरिक रुप से भी परेशान करना शुरू कर दिया। इससे दुखी शंाति देवी छह साल पहले एक आश्रम में रहने चली गईं। बेटे इसे अपनी बदनामी मानकर शांति देवी को परेशान करने लगे। तंग आकर शांतिदेवी ने बेटाें की शिकायत आगरा पुलिस में कर दी। जिसके बाद थाने में हुए राजीनामे में बेटाें ने अपनी वृद्ध मां को खर्चे के लिए दो-दो हजार रुपये देने की बात कही लेकिन दो माह बाद ही बेटों ने खर्च देना बंद कर दिया।
आखिरकार मंगलवार को शांतिदेवी शेष जीवन गुजारने के लिए किसी तरह वृंदावन पहुंची। जहां सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिभा शर्मा ने उन्हें बस स्टैंड पर बिलखता देखा तो उनकी आपबीती सुनकर उनके होश उड़ गए। वृद्धा ने बताया कि आगरा के शांति नगर में 516 वर्ग गज में पति का मकान और आठ बीघा खेत था। जिस पर बेटों ने जबरन कब्जा कर रखा है। उधर, महिला को उन्होंने छटीकरा मार्ग स्थित राधिका अपना घर में आश्रय दिला दिया है।