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निशाने पर हैं यमुना जल को जहर बनाने वाली इकाइयां

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यमुना नदी - फोटो : demo
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मथुरा। यमुना में जहर घोल रहीं औद्योगिक इकाइयों की कड़ी निगरानी शुरू हो गई है। जिन कारखानों में ईटीपी (इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) नहीं लगे है, या फिर प्लांट ठीक से कार्य नहीं कर रहे है। उन उद्योगों को सूचीबद्ध किया जा रहा है। जल्द ही ऐसे कारखानों पर सीलिंग की कार्रवाई करने की तैयारी है।
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यमुना को लेकर हाईकोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) गंभीर है। यमुना की खादर में बसी कॉलोनियां, शहर में चल रही औद्योगिक इकाइयां, सीईटीपी संचालन सहित कई मामले में न्यायालयों में लंबित हैं।

इन पर हाल ही में कई कड़े आदेश भी जारी किए गए हैं। न्यायालय के रुख को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी अपनी तैयारियों में जुट गया है। अब पुरानी फाइलेें खंगाली जा रही है। ऐसे कारखानों को सूची बद्ध किया जा रहा है जहां ईटीपी ठीक से संचालित नहीं हो रहे हैं। इसकी शुरुआत छाता में संचालित स्क्रैप फैक्ट्री से हो गई है।
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तीन दिन पहले यमुना कार्य योजना क्रियान्वयन समिति की बैठक में भी प्रदूषण फैला रहे उद्योगों का मामला उठा था। इसमें याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने उद्योगों की निगरानी पर सवाल उठाए थे। इसे लेकर नोडल अधिकारी ने प्रदूषण बोर्ड को साप्ताहिक नमूने लिए जाने के आदेश दिए थे।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अरविंद कुमार ने कहा कि जो उद्योग प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं है उनके खिलाफ कार्रवाई तय है। इसको लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं बोर्ड कड़ी निगरानी कर रहा है सूची भी तैयार की जा रही है।
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