मथुरा। यमुना के खादर में 500 कालोनियां बसा दी गई हैं। इसमें भी अधिकांश कालोनियां बाढ़ लेवल के दायरे में हैं, जो पूरी तरह से अवैध बनी हुई हैं। इस पर अब तक मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अभियंता खामोश रहे हैं।
रिफाइनरी टाउनशिप के निकटवर्ती गांव कोयला अलीपुर से लेकर वृंदावन तक यमुना के खादर में अवैध कालोनियाें की बाढ़ है। करीब 22 किलोमीटर के इस दायरे में 500 से ज्यादा कालोनियां पिछले एक से डेढ़ दशक के दौरान बसी हैं। इनमें से भी 40 प्रतिशत कालोनियां ऐसी हैं, जो यमुना में बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के दायरे में हैं। एक अनुमान के मुताबिक इन कालोनियों में करीब 3 लाख लोग रह रहे हैं, जिनमें से किसी के पास भी न तो नगर निगम की एनओसी है न मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण का स्वीकृत नक्शा। बगैर स्वीकृति के ही निर्माण किया गया।
निर्माण पर हर वक्त निगाह रखने वाले मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के अवर अभियंता और सहायक अभियंताओं ने यमुना के खादर में बनी इन कालोनियों को नजर अंदाज किया। गत दिवस एडीएम प्रशासन अजय कुमार अवस्थी द्वारा राजपुर खादर में की गई निर्माण की जांच ने इस स्थिति के संकेत दे दिए हैं। गौरतलब रहे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। इससे अब अफसरों में खलबली मची हुई है।
यमुना के खादर में बनी कालोनियों का जल्द सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद ही खादर में अवैध निर्माण की स्थिति साफ होगी। फिलहाल खादर में निर्माण मिलने पर अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रवींद्र कुमार, प्रभारी सचिव, विकास प्राधिकरण, मथुरा