मथुरा। साड़ियां जीएसटी के दायरे में आने पर यमुना प्रदूषण के चलते संकट से गुजर रहे मथुरा के साड़ी उद्योग की परेशानी और भी बढ़ जाएगी। इससे उद्यमियों में बेचैनी है।
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में साड़ी (कपड़े) पर पांच प्रतिशत का कर लगाया गया है। आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब कपड़े को कर के दायरे में लाया गया है। उद्यमियों को भी इसी बात की टीस है।
साड़ी कारोबारी महावीर मित्तल ने बताया मथुरा में छपने वाली साड़ी (मथुरा प्रिंट) देश में भर में सप्लाई होती है। इसकी कीमत मात्र 70 रुपये से लेकर 150 रुपये होती है। इसे देश का सबसे गरीब तबका पहनता है। इस पर अगर कर लगेगा तो कीमत में इजाफा होगा। इसका सीधा असर गरीबों पर पड़ेगा।
साड़ी कारखाना स्वामी संजय अग्रवाल ने बताया मथुरा का साड़ी उद्योग पहले ही यमुना प्रदूषण के चलते प्रदूषण नियंत्रण के कड़े मानकों से गुजर रहा है। अब उद्योग पर और भी बुरा असर पड़ेगा।
देश के कोने-कोने में जाती हैं मथुरा से साड़ी
मथुरा में साड़ी के करीब 60 कारखाने हैं। करीब 5 हजार मजदूर सीधे जुड़े हुए हैं। इन कारखानों में बनने वाली साड़ियां असम, बंगाल, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार सहित लगभग सभी राज्यों में जाती है।
विरोध में कपड़ा बाजार की हड़ताल
थोक कपड़ा व्यवसायी समिति के बैनर तले कपड़ा कारोबारी जीएसटी के विरोध में गुरुवार को कारोबार बंद रखेंगे। समिति के अध्यक्ष मीनालाल अग्रवाल, महामंत्री ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कपड़ा आम व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है। इस पर जीएसटी अनुचित है।