एटा के रहने वाले यतेन्द्र के मोबाइल गेम में 1.10 करोड़ डूब गए। साहूकारों के तकादे से परेशान होकर उसने जान दे दी। उसके पिता भी कर्ज में बर्बाद हुए थे। उन्होंने भी कर्ज से परेशान होकर अपनी जान दी थी।
यूपी के एटा जिले में मोबाइल गेम के चक्कर में 1.10 करोड़ रुपये गंवाने के बाद कर्ज में डूबे यतेंद्र ने मंगलवार रात फंदा लगाकर जान दे दी। मामला कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव जिरसमी का है। बताया गया है कि यतेंद्र के पिता ने भी कर्जदारों से परेशान होकर जान दे दी थी।
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कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव जिरसमी निवासी चंद्रकेतु ने बताया कि कोरोना काल के दौरान भाई ने ऑनलाइन गेम खेल कर अपने ऊपर कर्जा कर लिया था। उसके साथ ही कर्जदार उसके पूर्व प्रधान पिता सतेंद्र सिंह को भी परेशान करने लगे थे। इसी बात से तंग आकर 20 मई को पिता ने एक साथ नींद की 60 गोलियां खा ली थी।
उनका उपचार चला और स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो घर ले आए लेकिन मानसिक तनाव के चलते उनकी फिर तबीयत बिगड़ी और 7 जून को जान चली गई। पिता की तेरहवीं से पहले ही कर्जदार घर पर आने लगे और हम लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया। सीओ सिटी अमित कुमार राय ने बताया कि मामले में अभी कोई तहरीर नहीं मिली है, मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
महीने पर कमाई 15 हजार कर्ज की देनदारी 1.30 लाख
चंद्रकेतु ने बताया कि यतेंद्र ने आरओ और आटा चक्की का काम कर लिया था। इसमें महीने में करीब 15 हजार रुपये की कमाई होती थी। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल था। कर्ज निपटाने के लिए हर महीने 1.30 लाख रुपये साहूकारों को अदा करने थे जिसमें वह पूरी तरह असमर्थ हो चुके थे।
चार माह में दो लोग कर्ज से परेशान होकर दे चुके हैं जान
कर्ज के बोझ तले दबकर इससे पहले दो लोग चार महीने में जान दे चुके हैं। 26 मार्च को कोतवाली नगर के गांव भगीपुर में एक युवक ने फंदा लगाकर तो 13 जून को थाना अवागढ़ क्षेत्र में पुलिस चौकी के अंदर होमगार्ड ने गोली मारकर जान दी थी।
गांव भगीपुर निवासी रामू बस स्टैंड और बसों के अंदर जाकर टॉफी, हींग व अन्य सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। रामू के ऊपर कर्ज हो गया था, जिसके चलते वह परेशान रहते थे। इसी तनाव में 26 मार्च को उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी।
दूसरी घटना 13 जून की है। कर्ज से परेशान अवागढ़ थाना क्षेत्र के गांव गदेसरा निवासी होमगार्ड सर्वेंद्रपाल ने पुलिस चौकी पोंड़री के अंदर ही तमंचे से गोली मारकर जान दे दी। भाई महीपाल ने बताया कि इनके ऊपर लगभग 7 लाख रुपये का कर्ज था। इसके चलते मानसिक रूप से परेशान रहते थे।