लखनऊ। राजधानी र्में ई-स्टांपिंग सेवा की राह में पहले ही दिन रोड़ा आ गया। इसके लिए जरूरी ऑनलाइन सिस्टम सोमवार को चालू नहीं हो पाया। ऐसे मेें बैंकों से ई-स्टाम्प जारी करने का कार्य शुरू नहीं हुआ और लोगों को निराश लौटना पड़ा। सदर रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे कुछ लोगों को निबंधन अधिकारियों ने एसएचसीआईएल की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 30.65 लाख रुपये के ई-स्टाम्प उपलब्ध कराए गए। रजिस्ट्री के लिए बैंकों से ई-स्टाम्प मिलने में अभी एक-दो दिन इंतजार करना होगा। वैसे निबंधन अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एसएचसीआईएल) के प्रतिनिधि ने मंगलवार तक ऑनलाइन सिस्टम शुरू करने की पूरी उम्मीद जताई है। विभागीय जानकार के मुताबिक सोमवार को संबंधित बैंक शाखों के कोड आवंटित न हो पाने के चलते ऑनलाइन सिस्टम के तहत ई स्टांपिंग सेवा चालू नहीं हो पाई। उक्त सेवा के तहत अधिकृत बैंकों की सभी शाखों को एक कोड आवंटित किया जाना है। कोड के तहत ही वह ई-स्टाम्प निर्गम की सूचना संबंधित निबंधन अधिकारी को देंगे। बैंक द्वारा भेजी गई ऑनलाइन जानकारी के आधार पर निबंधन अधिकारी ई स्टाम्प का वेरीफिकेशन कर रजिस्ट्री करेंगे। मालूम हो कि ई स्टांपिंग सेवा का शनिवार को विभागीय मंत्री ने उद्घाटन किया था। सोमवार से पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉरपोरेशन सहित आधा दर्जन बैंक की शाखाओं के माध्यम से संपत्ति खरीदारों को ई-स्टाम्प उपलब्ध कराने की एसएचसीआईएल को जिम्मेदारी दी गई थी। बैंक शाखाओं में इ- स्टाम्प न मिलने की स्थिति में कुछ लोग जानकारी करने रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचे। राजधानी में निबंधन विभाग के सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) ओपी सिंह के मुताबिक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री दफ्तर में एसएचसीआईएल के सिस्टम से कुछ लोगों को 14.65 लाख रुपये के ई-स्टाम्प उपलब्ध कराए। उधर, एसएचसीआईएल ने हजरतगंज इलाके में स्थित अपने कार्यालय से 16 लाख रुपये के ई स्टाम्प निर्गत किए। इस तरह सोमवार को बैंक की व्यवस्था शुरू न हो पाने के बावजूद भूसंपत्ति खरीदारों को 30.65 लाख रुपये के ई स्टाम्प उपलब्ध कराए गए।