लखनऊ। केदारनाथ त्रासदी में फंसे अपनों के सकुशल घर लौटने के इंतजार में बैठे परिवार वालों का अब धैर्य जवाब देने लगा है। उत्तराखंड के पहाड़ों में फंसे राजधानी के सैकड़ों लोगों के परिवारवाले अब उन्हें ढूंढने निकल पड़े हैं। कोई देहरादून में फोटो लेकर अपने परिजनों को तलाश रहा है तो कोई खुद की जिंदगी खतरे में डालकर केदारनाथ धाम के आसपास जंगलों के रास्ते से आपदा प्रभावित इलाकों तक पहुंच गया है। माल थानाक्षेत्र के करीब 10 लोग अभी भी केदारनाथ के पास किसी अज्ञात जगह पर फंसे हुए हैं। करीब सात दिन से कोई संपर्क भी इनका परिजनों के साथ नहीं हुआ। ऐसे में एक तरफ जहां परिजनों को खो देने का डर सता रहा है। वहीं, दूसरी तरफ दिल में आशा बलवती है। अभी भी बचाकर निकाले जा रहे लोगों की सूची में उन्हें अपनों के शामिल होने की भी आशा जाग उठती है। ऐसे में परिजन केदारनाथ की तबाही का गवाह बनी जगह रामबाड़ा तक तलाश में पहुंच गए हैं। इन लोगों के साथ गए एजेंट नागेश्वर जोशी के बेटे श्याम जोशी ने बताया कि करीब दस लोगों का दल लापता है। उसकी बात 15 जून को अंतिम बार हुई। तब यह लोग केदारनाथ धाम के दर्शन करने जा रहे थे। इसके बाद से कोई बात नहीं हुई। लापता होने वाले लोगों में माल थानाक्षेत्र से काकराबाद गांव निवासी बजलू शाह, भैया लाल, रामकुमार व उनकी पत्नी रामकुमारी, जलथंभा गांव निवासी अमर सिंह, उनकी पत्नी राजरानी व नातिन रामदेवी, बजनियां गांव निवासी रामस्वरूप व उनकी पत्नी शीतला देवी भी लापता हैं। इनकी तलाश में परिजन शनिवार को रामबाड़ा तक पहुंचे। भैयालाल के परिजन रामस्वरूप ने बताया कि अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। उधर, आपदा में बचने वाले जिन लोगों का नाम सूची में तो है, लेकिन अभी तक उनकी सूचना नहीं मिल पा रही है। लखनऊ के इंदिरानगर की 16 साल की धैर्या भी उनमें से एक है। धैर्या पिता धनंजय, मां सुनीता और भाई दो अन्य लोगों के साथ केदारनाथ गए थे। 17 जून को शाम 5 बजे मामा बृजेश श्रीवास्तव से बात हुई थी। तब वे सभी रुद्रप्रयाग के ओखीमठ पर फंसे हुए थे। उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया। हादसे की खबर पाकर बृजेश श्रीवास्तव खुद देहरादून पहुंच गए। बचने वालों की सूची में उन्होंने धैर्या का नाम देखा। काफी तलाश के बाद भी उसकी कोई सूचना नहीं मिल सकी। बाकी तीन लोगों की तो कोई खबर ही नहीं है।