लखनऊ। स्कूलों की फीस संरचना में पारदर्शिता लाने की सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की कोशिशें राजधानी के स्कूल प्रबंधनों की जिद के आगे नकाफी साबित हो रही है। सीबीएसई की ओर से जारी निर्देशों के दो साल बाद भी अभिभावकों से मोटी-मोटी फीस वसूलने वाले स्कूल वेबसाइट बनाकर अपनी फीस संरचनाओं को सार्वजनिक करने के लिए तैयार नहीं हैं। राजधानी के 40 प्रतिशत सीबीएसई के स्कूलों के पास अभी तक अपनी वेबसाइट नहीं है। वहीं, जिनके पास वेबसाइट है, वे भी सूचनाएं सार्वजनिक करने से कतरा रहे हैं। 8 अक्टूबर 2010 को सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को खुद की वेबसाइट विकसित करने संबंधी निर्देश जारी किए थे। इस संबंध में जारी किए गए सर्कुलर के तहत छह माह यानी 18 अप्रैल 2011 तक सीबीएसई के सभी स्कूलों को अपनी वेबसाइट बनानी थी। यहीं नहीं, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की नीयत से बोर्ड ने स्कूलों के संबंध में कई जानकारियों को उपलब्ध कराने की अनिवार्यता भी निर्धारित की थी। इसमें स्कूल की सभी कक्षाओं की फीस संरचना से लेकर स्कूल में कार्यरत शिक्षकों की योग्यता तक को सार्वजनिक किया जाना था। इस संबंध में दी गई समय-सीमा के समाप्त होने के बाद भी राजधानी में सीबीएसई से संबद्ध करीब तीन दर्जन स्कूलों ने अपनी वेबसाइट विकसित नहीं की है जबकि कई स्कूलों ने बोर्ड की ओर से निर्देशित जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है।