लखनऊ। राजधानी पुलिस की बर्बरता के शिकार हुए साढ़े पांच साल के मासूम सुदीप (परिवर्तित नाम) के मामले की जांच अब बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) करेगी। गुरुवार को सीडब्ल्यूसी, पुलिस और यूनिसेफ के प्रशिक्षकों के दल ने सुदीप से मिलकर उसका हाल जाना। बच्चे ने अपने साथ हुई अमानवीयता के बारे में सीडब्ल्यूसी को बताया। कमेटी ने शुक्रवार को सुदीप और उसके पिता को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है। कृष्णानगर पुलिस ने मासूम सुदीप पर चोरी का इल्जाम लगाकर उसे न केवल लॉकअप में रखा बल्कि बिजली का करंट और जूतों से पीटा भी। ‘अमर उजाला’ ने गुरुवार के अंक में पुलिस की इस अमानवीयता को प्रमुखता से उठाया। इस पर संज्ञान लेते हुए बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बनी विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं सक्रिय हुईं। 2 फरवरी की यह घटना 6 फरवरी प्रकाश में आने के बाद देरी से ही सही, कई लोग सुदीप और उसके परिवार का हाल लेने आलमबाग उसके घर पहुंचे। बाल कल्याण समिति सदस्य, विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) के पुलिसकर्मियों, यूनिसेफ के तहत किशोर न्याय अधिनियम पर उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण समन्वयक मनीष सिंह और एसजेपीयू से संबद्ध एक गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधि की टीम ने बच्चे से घटना की जानकारी ली। सुदीप ने बिना डरे पूरा किस्सा बयान किया। इसके बाद टीम के कुछ सदस्य कृष्णानगर थाने पहुंचे जहां पुलिस का पक्ष जाना गया। यहां से लौट कर तय किया गया कि सीडब्ल्यूसी मामले की जांच करेगी ताकि दोषी पुलिसकर्मियों तक पहुंचा जा सके।