फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मजलिस-ए-अजा में उमड़ा हुसैनियों का हुजूम

Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ । करबला के शहीदों की याद में मजलिस-ए-अजा पर हुसैनियों का हुजूम अपने इमाम को पुरसा देने को बेकरार दिखा। हर तरफ स्याह लिबास में अजादार एक मजलिस से दूसरी मजलिस में सुबह से रात तक हजरत इमाम हुसैन को याद करते रहे। मजलिसों के दौरान शहर में अमन कायम रखने को लेकर उलमा ने प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन को सचेत भी किया। इमामबाड़ा आगा वाकर में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि अहलेबैत वे हैं जिनके घर फरिश्ते आते हैं। रसूल के अहलेबैत से मोहब्बत रखने वाला ही सच्चा मुसलमान है। अल्लाह ने रसूल व आल ए मोहम्मद को इंसानियत की हिदायत के लिए दुनिया में भेजा। मौलाना ने कहा कि शियत के खिलाफ साजिश की जाती है लेकिन सरकारों को इस बात से अनजान नहीं रहना चाहिए कि शियत एक बहुत बड़ी ताकत है वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर शिया समुदाय के इस खास मौके पर ध्यान दें। इमामबाड़ा मदरसा नाजमियां में मौलाना हमीदुल हसन ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन मदीने से हिजरत न करते तो मुसलमानों का वजूद खत्म हो जाता। मौलाना ने जब हजरत हुर व उनके बेटे की शहादत का वाकया बयान किया तो अजादार रोने लगे और या हुसैन की सदाएं बुलंद होने लगीं। इमामबाड़ा जकी अली खां में मजलिस को मौलाना सैयद शबाहत हुसैन रिजवी ने संबोधित करते हुए अहलेबैत और हदीस की रौशनी में बयान पेश किया। वहीं वक्फ इमामबाड़ा कस्रे जन्नत, जन्नत की खिड़की में मौलाना एजाज हुसैन रिजवी ने मजलिस को संबोधित करते हुए करबला के शहीदों पुरसा दिया। शिया पीजी कॉलेज में मौलाना आगा रूही ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह और उसके रसूल व आल पर भरोसा न करने वाले मुसलमान नहीं हैं। यह मुसलमानों के नकाब में समाज में दहशतगर्दी फैलाने का काम कर रहे हैं। मौलाना ने जब हजरत मुसलिम के मासूम बेटों की शहादत का जिक्र किया तो यहां मौजूद अजादार रोने लगे। इमामबाड़ा गुफरानमॉब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि मुसलमानों के खिलाफ मुसलिम मुल्क ही साजिशें कर रहे हैं। यह अरब मुल्क अमेरिका व इजराइल के साजिश के तहत मुसलमानों को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं क्यों ये कुछ देश अमेरिका व इजराइल के एजेण्ट हैं। मौलाना ने कहा कि कहा जाता है कि ताजिया शबीह है रखना बिदअत है लेकिन क्या दुम्बा या बकरीद में बकरा काटना बिदअत नहीं है। यह भी तो हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल की कुरबानी की शबीह ही है। मौलाना ने मुसलमानों से शहर में अमन कायम रखने की अपील की। इमामबाड़ा जन्नतम्आब में मौलाना सैफ अब्बास ने कुरान और अहलेबैत पर मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि अहलेबैत से हट कर मुसलमानों का वजूद खत्म हो जाता है। इसलिए कुरान और नमाज व मसजिदें सब रसूल और उनके अहलेबैत से मोहब्बत का नतीजा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें