H-1B वीजा
डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही घरेलु विकास, राष्ट्रवाद और सीमाओं की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध रहे हैं। ऐसे में अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप के पहले शासन काल में H-1B वीजा की पात्रता की शर्तों को काफी सख्त कर दिया गया था।
ट्रंप के दोबारा आने के बाद इमिग्रेशन और H-1B वीजा की नीतियों में कठोर और प्रतिबंधात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इसका सीधा असर भारत के उन लोगों के ऊपर पड़ेगा जो अमेरिकी बाजार में नौकरी की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा जो लोग गैर कानूनी ढंग से मैक्सिको और कनाडा के रास्ते डंकी के जरिए अमेरिका में घुसते हैं उसको लेकर भी ट्रंप नए और सख्त नियम ला सकते हैं।
ट्रेड नीतियां
ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में तेज आर्थिक विकास पर जोर दिया है। इस कारण दोबारा से सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप उन्हीं व्यापार नीतियों पर जोर देंगे जो अमेरिकी केंद्रीत हैं। इसके अलावा अमेरिका भारत पर ट्रेड बैरियर्स और टैरिफ को कम करने के लिए जोर डालेगा। इसका सीधा प्रभाव भारत के आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और टैक्सटाइल इंडस्ट्री पर देखने को मिलेगा। इसके अलावा ट्रंप शासन काल में रेसिप्रोकल टैक्स को भी लागू किया जा सकता है। इसका जिक्र उन्होंने चुनाव प्रचार में भी किया था।
डिफेंस
बीते सालों में भारत और अमेरिका के बीच सैन्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कई बड़े समझौते हुए हैं। ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद भारत अमेरिका के बीच सैन्य और रक्षा से जुड़े मसलों पर आगे भी कई बड़े समझौते हो सकते हैं। साउथ एशिया में चीन का बढ़ता वर्चस्व और उसकी विस्तारवादी नीतियों से मुकाबला करने के लिए दोनों देश एक साथ आगे आ सकते हैं। क्वाड जैसे समूह जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं उस पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।