क्या है एआई वॉइस क्लोनिंग तकनीक?
एआई वॉइस क्लोनिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी सिस्टम या मशीन को व्यक्ति विशेष का सैंपल वॉइस देकर ट्रेन्ड किया जाता है। इसके बाद वह तकनीक उस व्यक्ति विशेष की आवाज, टोन और पैटर्न की हूबहू नकल करने लगती है। इसके बाद एआई टूल की मदद से उस व्यक्ति विशेष की आवाज में कुछ भी बुलवाया जा सकता है।
आज के समय बड़े पैमाने पर इस तकनीक का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग, साइबर धोखाधड़ी, फिशिंग, फेकन्यूज, डिसइंफोर्मेशन फैलाने आदि चीजों में किया जा रहा है। यही नहीं लोकप्रिय सेलिब्रिटी और राजनेताओं की सामाजिक और राजनीतिक छवि को खराब करने के उद्देश्य से भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
फिशिंग अटैक में किया जा रहा वॉइस क्लोनिंग का इस्तेमाल
एआई वॉइस क्लोनिंग का सबसे गलत इस्तेमाल फिशिंग अटैक में किया जा रहा है। इसमें जालसाज पहले एआई की मदद से किसी व्यक्ति विशेष की आवाज की नकल करते हैं। इसके बाद जालसाज परिवार के सदस्यों को उस व्यक्ति की आवाज में फोन कॉल करके किसी झूठी परेशानी का हवाला देकर पैसों की मांग करता है। इस झांसे में कई लोग आसानी से फंस जाते हैं।
वॉइस क्लोनिंग के कई नैतिक और सामाजिक समस्याएं सामने निकलकर आ रही हैं। इसमें किसी व्यक्ति विशेष की अनुमति के बिना उसकी आवाज का दुरुपयोग किया जा रहा है।