मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा में पीटीए शिक्षकों को नियमित करने के लिए नई शर्तों का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पीटीए शिक्षकों को अनुबंध में आने के बाद एक या डेढ़ साल में नियमित कर दिया जाएगा।
इन्हें अध्यापन का पर्याप्त अनुभव है, इसलिए अनुबंध सेवाकाल में सरकार छूट दे सकती है। मुख्यमंत्री मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक जयराम ठाकुर, रणधीर शर्मा और आशा कुमारी के सवालों का जवाब दे रहे थे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पीटीए शिक्षकों को अनुबंध में लेने के लिए सरकार जो नीति लाई है, वह ऐसी है कि 70 फीसदी टीचर इससे बाहर हो जाएंगे। पीटीए शिक्षकों को तीन साल के भीतर ग्रेजुएशन में 50 फीसदी अंकों की शर्त पूरी करनी है।
टीईटी पास करना है, पीजीटी को बीएड की डिग्री पेश करनी है। इन शर्तों से बहुत से शिक्षक अपात्र हो जाएंगे। रणधीर शर्मा ने भी कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि कुल कितने पीटीए शिक्षक इस वक्त हैं और इनमें से कितने नई शर्तों से बाहर होंगे?
पीटीए नियुक्ति में आरक्षण रोस्टर की अनदेखी पर सरकार क्या कदम उठाएगी? जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इस समय सरकारी स्कूलों में कुल 6318 शिक्षक कार्यरत हैं। ये स्कूल लेक्चरर, डीपीई, टीजीटी, सीएंडवी और कालेज लेक्चरर कैटेगेरी में हैं। उन्होंने दावा किया कि नई शर्तों के कारण इनमें से कोई भी बाहर नहीं होगा।
कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने पूछा कि भाजपा शासनकाल में जिन शिक्षकों को निकाला जा चुका है, उन्हें सरकार किस तरह राहत देगी?
मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि जिन शिक्षकों को निकाला गया था, सरकार उन्हें पीटीए शिक्षक मानते हुए दोबारा नियुक्ति के लिए कंसीडर करेगी। गौरतलब है कि वर्तमान में सरकार की नीति के अनुसार आठ साल का सेवाकाल पूरे करने वाले पीटीए शिक्षकों को अनुबंध में बदले जाने का प्रावधान है। अनुबंध नीति में आठ वर्ष बाद नियमित नियमित होने का प्रावधान है।