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सर्जिकल स्ट्राइकः जानिए अमावस की रात में कैसे दुश्मनों पर टूट पड़े थे भारतीय जांबाज

Thu, 09 Feb 2017 05:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Amar Ujala
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उड़ी हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस तरह पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देकर आतंकियों को मौत के घाट उतारा था उसने भारतीय जवानों की बहादुरी का लोहा पूरी दुनिया में मनवा दिया था। सर्जिकल स्ट्राइक के इस मिशन को अंजाम दिया था भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट ने। 
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29 सितंबर को सेना के पैराशूट जवानों ने सीमा पार कर किस तरह आंतकियों के लांच पैड को ध्वस्त कर पाकिस्तान को तगड़ा झटका पहुंचाया था उस ऑपरेशन के कुछ डॉक्यूमेंट्स को सरकार की ओर से मीडिया के लिए जारी किया गया है। 19 पैरा बटालियन के इन्‍ही कमांडोज को उनकी बहादुरी के लिए इस 26 जनवरी को सम्मानित किया गया था। 

डॉक्यमेंट्स के अनुसार ऑपरेशन को एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सुबेदार, दो नायब सुबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैरा ट्रूपर ने अंजाम दिया था। पैरा रेजीमेंट की चौ‌थी और नौंवी बटालियन के इन जवानों ने बहुत बहादुरी और कामयाबी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया।
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सेना के पैरा कमांडोज ने दिया था ऑपरेशन को अंजाम

- फोटो : file photo
जानकारी के अनुसार 4पैरा के मेजर रोहित सूरी को उनकी इस बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र, 4 पैरा के ही कमांडिंग ऑफिसर कर्नल हरप्रीत संधु को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा टीम को चार शौर्य चक्र, 13 सेवा मेडल दिए गए हैं। 

कर्नल हरप्रीत संधु को इस पूरे ऑपरेशन की टास्क सौंपी गई थी। सेना ने इस हमले की तैयारी उड़ी हमले के बाद शुरू की थी, जिसमें आतंकियों ने 17 जवानों की हत्या कर दी ‌थी। इस वारदात के बाद सेना ने जवाबी हमले की तैयारी कर ली थी, इसके लिए अमावस्या की रात का इंतजार किया गया। इसके बाद 28-29 की रात्रि वो घड़ी भी आ गई जब सेना ने अपने ऑपरेशन को शुरू किया। 

मेजर रोहित सूरी की आठ सदस्यीय स्ट्राइक टीम को आतंकियों के संसाधनों को ध्वस्त करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। मेजर सूरी ने अपनी टीम को निर्देश दिया कि वो आतंकियों को खुले में उनके लांच पैड पर ही आने के लिए मजबूर करे। 

एक कर्नल और पांच मेजर ने किया ऑपरेशन को लीड

- फोटो : Amar Ujala
जवानों की चुनौती मिलते ही जैसे ही आतंकी खुले में आए जवानों ने एक झटके में उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इसी बीच मेजर सूरी ने नजदीकी जंगल में दो जिहादियों की गतिविधि महसूस की। आसमान में मंडरा रहे यूएवी ने भी दो आतंकियों की गतिविधि को नोटिस किया। यह देख मेजर सूरी ने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों आतंकियों पर हमला बोल दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 

खास बात ये है कि एक अन्य मेजर और उनकी टीम को ऑपरेशन से दो दिन पहले ही आतंकियों के लांच पैड की निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जिसके बाद मेजर अपने साथियों के साथ 48 घंटे पहले ही सीमा पार कर आतंकियों के इलाके में पहुंच चुके थे। 

उन्होंने टारगेट का मैप बनाकर भी ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम तक पहुंचा दिया था। टीम ने दुश्मन के ऑटोमेटिक हथियारों के बारे में सटीक जानकारी जुटाई। इसके अलावा जिस जगह से हमारे जवान दुश्मनों पर सटीक हमला कर सकें उस जगह की भी सही जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाई गई।
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हमले में किसी भारतीय जवान को नहीं पहुंची थी कोई क्षति

- फोटो : Amar Ujala
इस अफसर ने दुश्मनों के एक हथियार घर को भी तबाह करके दो आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया। हालांकि इस दौरान उनकी टीम नजदीक से हो रही फायरिंग की चपेट में भी आ गई। शुक्र रहा कि उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा। भारी खतरे के बीच मेजर ने उस हथियारघर को भी तबाह करते हुए एक आतंकी को मौत के घाट उतार दिया।

हथियारों का शोर समाप्त होने के बाद तीसरा मेजर अपने साथी के साथ एक अन्य हथियारघर के पास पहुंचा और उसे तबाह कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद सभी आतंकी नींद के दौरान ही मौत की नींद चले गए। इसके बाद उसने हमला करने वाली दूसरी टीम को भी सुरक्षित स्‍थान तक पहुंचाया। 

पूरी वारदात के दौरान सभी टीमों में गजब का सामंजस्य रहा जिससे ऑपरेशन में शामिल जवानों को जान की कोई हानि नहीं पहुंची। बस एक पैराट्रूपर घायल हो गया। माइन पर पैर पड़ने के कारण उसका पंजा उड़ गया, जिसे उसके साथी सुरक्षित वापिस लाने में सफल रहे।
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