101 साल के बुजुर्ग कदम अब किसी भी पेशेवर मैराथन प्रतियोगिता में युवाओं से रेस लगाते नहीं नजर आएंगे। दुनिया के सबसे उम्रदराज धावक फौजा सिंह ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय मैराथन प्रतिस्पर्धा से संन्यास की घोषणा कर दी।
हांगकांग में हुई मैराथन भारतीय मूल के ब्रिटिश धावक की जिंदगी की आखिरी रेस रही। फौजा यहां कोई मेडल नहीं जीत पाए, लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने दौड़ पूरी की। एक रेसर के रूप में यह उनके लिए बेहद भावुक क्षण था।
उन्होंने कहा, मैं काफी खुश हूं। जब मैं दौड़ता हूं तो मुझे खुशी महसूस होती है। लेकिन अब मैं थक गया हूं। इसलिए रेस को अलविदा कह रहा हूं। उन्होंने 10 किलोमीटर की अपनी आखिरी रेस एक घंटे 32 मिनट और 28 सेकेंड में पूरी की। हालांकि वह इस दौरान अपने व्यक्तिगत रिकार्ड को भी नहीं छू पाए।
फौजा को लोग प्यार से ‘टर्बनेड टॉरनैडो’ कह कर पुकारते हैं। आगामी एक अप्रैल को वह 102 साल के हो जाएंगे। उन्होंने लंदन, टोरंटो और न्यूयॉर्क में 26 मील की फुल मैराथन नौ बार पूरी की है। उन्होंने सबसे बेहतरीन समय टोरंटो में निकाला था। यहां उन्होंने पांच घंटे 40 मिनट में अपनी रेस खतम की थी।
बकौल फौजा, वह किसी तरह की शारीरिक बीमारी से पीड़ित नहीं है। उन्होंने धर्मार्थ कार्यों के लिए 1999 में 89 साल की अवस्था में मैराथन में हिस्सा लेने का फैसला लिया था। फौजा ने कहा कि मैं इस दिन को हमेशा याद रखूंगा और बहुत मिस भी करूंगा। लेकिन धर्मार्थ कार्यों के लिए दौड़ने का सिलसिला मेरे बाद भी जारी रहेगा।
कौन हैं फौजा सिंह
फौजा का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ। ब्रिटेन में बसने से पहले वह भारत में खेती किसानी का काम करते थे। इतने साल ब्रिटेन में रहने के बाद हिंदी या अंग्रेजी के बजाय वह सिर्फ पंजाबी बोलते हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि वह अंग्रेजी बोल या लिख नहीं पाते।
पांच साल की उम्र तक नहीं चल पाते थे
दुनिया के सबसे बुजुर्ग मैराथन धावक के बारे में एक और रोचक बात है। अपनी दौड़ का लोहा मनवाने वाले फौजा शुरू में चल नहीं पाते थे। पांच साल का होने के बाद उन्होंने चलना शुरू किया था।
नहीं दर्ज हो सकता रिकॉर्ड
वह 2011 में टोरंटो की फुल मैराथन में हिस्सा लेने वाले दुनिया के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थे। हालांकि जन्म प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण उनका यह रिकॉर्ड गिनीज बुक में नहीं दर्ज हो सका। गिनीज ने फौजा के पासपोर्ट को उनकी उम्र का सही आधार नहीं माना।
--89 साल के उम्र में फौजा ने धर्मार्थ शुरू किया मैराथन में दौड़ना।
--5.40 घंटा है उनकी सर्वश्रेष्ठ टाइमिंग फुल मैराथन पूरी करने की।
--9 फुल मैराथन अब तक कर चुके हैं पूरी।
--1999 में पहली बार दौड़ में लिया था हिस्सा।