गुलवीर सिंह
- फोटो : ANI/Twitter
फौज में जाने का था सपना
1 जून 1998 को किसान परिवार में जन्मे गुलवीर सिंह के गांव में खेलों की दुनिया से ज्यादा चर्चा सेना में भर्ती की होती थी। गुलवीर भी सेना में जाना चाहते थे। उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स जैसी प्रतियोगिताओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। दौड़ उनके लिए शुरुआत में मेडल जीतने का रास्ता नहीं, बल्कि सेना में नौकरी हासिल करने का जरिया थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके गांव में बहुत कम लोग इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के बारे में जानते थे। प्रतिस्पर्धी दौड़ और एथलेटिक्स की असली दुनिया से उनका परिचय सेना में आने के बाद हुआ।
गुलवीर सिंह
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2018 में सेना में भर्ती, यहीं बदली जिंदगी
- साल 2018 में गुलवीर का सेना में जाने का सपना पूरा हुआ। वह खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुए और ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट का हिस्सा बने।
- यहीं से उनकी जिंदगी की दिशा बदलने लगी। सेना की ट्रेनिंग और अनुशासन के बीच उन्हें अपनी दौड़ की प्रतिभा को निखारने का मौका मिला।
- धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि ट्रैक पर उनकी क्षमता सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
ड्यूटी के साथ ट्रैक पर जारी रही मेहनत
गुलवीर को सेना की नौकरी के दौरान कठिन इलाकों में भी तैनाती मिली। अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य जिम्मेदारियों के बीच ट्रेनिंग करना आसान नहीं था। लेकिन यही कठिन परिस्थितियां उनकी सहनशक्ति को मजबूत करती गईं। ड्यूटी के बाद ट्रेनिंग और फिर प्रतियोगिताओं की तैयारी गुलवीर ने इसी अनुशासन के साथ खुद को लंबी दूरी की दौड़ के लिए तैयार किया।
2022 में मिला पहला बड़ा ब्रेक
सेना में भर्ती होने के बाद सफलता तुरंत नहीं मिली। करीब चार साल तक लगातार मेहनत करने के बाद गुलवीर ने 2022 में फेडरेशन कप में 10,000 मीटर का कांस्य पदक जीता। यह उनके करियर का वह मोड़ था, जहां से राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बनने लगी।
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एशियन गेम्स 2023 में मिला पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक
गुलवीर का अगला बड़ा पड़ाव 2023 का एशियन गेम्स था। हांगझोउ में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में उन्होंने 28:17.21 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। उस रेस में भारत के कार्तिक कुमार ने रजत और गुलवीर ने कांस्य जीता था। इस प्रदर्शन ने गुलवीर को एशिया के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों की कतार में पहुंचा दिया।
2024 में अमेरिका पहुंचे, फिर रिकॉर्ड टूटने लगे
2024 में गुलवीर ने अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में ट्रेनिंग शुरू की। वहां कोच स्कॉट सिमंस के मार्गदर्शन में उनकी तैयारी ने नया स्तर हासिल किया। इसके बाद भारतीय एथलेटिक्स में गुलवीर का नाम रिकॉर्ड के साथ जुड़ने लगा। 3000 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर में उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किए। विश्व एथलेटिक्स के मुताबिक 5000 मीटर में उनका राष्ट्रीय रिकॉर्ड 12:59.77 और 10,000 मीटर में 27:00.22 है। 3000 मीटर में भी उनके नाम 7:34.49 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज है।
2025 में बने डबल एशियन चैंपियन
साल 2025 गुलवीर के करियर का बेहद खास साल रहा। उन्होंने एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्डों को भी लगातार बेहतर किया। उनकी गति और रेस के आखिरी हिस्से में तेजी ने उन्हें लंबी दूरी की दौड़ में भारत की बड़ी उम्मीद बना दिया।
हाफ मैराथन में भी बनाया इतिहास
गुलवीर ने ट्रैक के अलावा रोड रेस में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने एक घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि बताती है कि उनकी क्षमता सिर्फ 5000 और 10,000 मीटर तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबी दूरी की अलग-अलग स्पर्धाओं में भी वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
ग्लासगो में रचा कॉमनवेल्थ इतिहास
2026 में गुलवीर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐसा इतिहास रचा, जो भारतीय एथलेटिक्स में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। ग्लासगो में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में उन्होंने 27:49.78 का समय निकालकर रजत पदक जीता। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद उन्होंने 5000 मीटर में भी कांस्य पदक जीता। इस तरह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो एथलेटिक्स पदक जीतकर उन्होंने अपने नाम एक और खास उपलब्धि जोड़ ली।
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अब एशियन गेम्स में भी रजत, कहानी और बड़ी हो गई
कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता के बाद गुलवीर के सामने एशियन गेम्स 2026 की चुनौती थी। इस बार वह पहले वाले गुलवीर नहीं थे। 2023 में जब वह पहली बार एशियन गेम्स में पहुंचे थे, तब विदेशी धावकों को देखकर उन्हें दबाव महसूस हुआ था। चार साल बाद जापान पहुंचे गुलवीर का आत्मविश्वास पूरी तरह बदल चुका था। उन्होंने प्रतियोगिता से पहले कहा था कि अब उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से डर नहीं लगता और वह खुद को उनके बराबर मानते हैं।
25 सितंबर 2026 को उन्होंने इस आत्मविश्वास को ट्रैक पर भी साबित किया। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में गुलवीर ने 28:29.38 के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इस पदक के साथ गुलवीर के एशियन गेम्स पदकों की संख्या दो हो गई है 2023 में कांस्य और 2026 में रजत।
रिकॉर्ड से ज्यादा पदक पर नजर
गुलवीर की खासियत यह है कि वह सिर्फ समय और रिकॉर्ड के बारे में सोचकर दौड़ने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। एशियन गेम्स से पहले भी उन्होंने साफ कहा था कि उनकी नजर पदक पर है। उनका मानना है कि ट्रैक पर प्रतिद्वंद्वी कोई भी हो, आखिरकार मुकाबला मेहनत और तैयारी का है। यही सोच उनकी रेसिंग रणनीति में भी नजर आती है—लंबे समय तक अपनी ऊर्जा बचाना और फिर आखिरी लैप में तेजी से हमला करना। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनकी यही रणनीति देखने को मिली थी, जहां आखिरी दौर में शानदार तेजी के दम पर उन्होंने ऐतिहासिक रजत हासिल किया था।
परिवार से दूर रहकर हासिल की कामयाबी
अमेरिका में ट्रेनिंग और लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के कारण गुलवीर को लंबे समय तक अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है। उन्होंने बताया है कि परिवार की याद उन्हें काफी आती है, लेकिन उनके माता-पिता हमेशा उनकी एथलेटिक्स को प्राथमिकता देने के फैसले का समर्थन करते हैं। एक किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनने की उनकी कहानी में परिवार का यह सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना ट्रैक पर उनका अनुशासन।
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गांव की पगडंडी से एशिया के पोडियम तक
गुलवीर सिंह की कहानी किसी ऐसे खिलाड़ी की कहानी नहीं है, जिसने बचपन से ओलंपिक या एशियन गेम्स का सपना देखा हो। उन्होंने तो शुरुआत सेना में भर्ती होने के लिए की थी। 2018 में सेना में भर्ती हुए, 2022 में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, 2023 में एशियन गेम्स कांस्य जीता, 2025 में दो एशियन चैंपियनशिप स्वर्ण अपने नाम किए, 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक 10,000 मीटर रजत और 5000 मीटर कांस्य जीता और अब उसी साल एशियन गेम्स में 10,000 मीटर का रजत पदक भी अपने नाम कर लिया। यानी जिस दौड़ की शुरुआत नौकरी पाने के लिए हुई थी, वह अब भारत के लिए इतिहास बनाने की दौड़ बन चुकी है।
गुलवीर सिंह
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गुलवीर सिंह की प्रमुख उपलब्धियां
- एशियन गेम्स 2026: 10,000 मीटर में रजत पदक
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 10,000 मीटर में रजत पदक
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: 5000 मीटर में कांस्य पदक
- एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025: 5000 मीटर स्वर्ण
- एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025: 10,000 मीटर स्वर्ण
- एशियन गेम्स 2023: 10,000 मीटर कांस्य
- एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023: 5000 मीटर कांस्य
- 10,000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 27:00.22
- 5000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 12:59.77
- 3000 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 7:34.49
- हाफ मैराथन: एक घंटे से कम समय में दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय