केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री, अनुराग ठाकुर ने घोषणा की कि "राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) ने खेल में उत्कृष्टता के उच्चतम वैश्विक मानकों को प्राप्त करने के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) से मान्यता प्राप्त की है।"
खेलमंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को बताया कि विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी (वाडा) ने राष्ट्रीय डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनडीटीएल) को फिर मान्यता दे दी है। वैश्विक मानदंडों पर खरे नहीं उतरने के कारण 2019 में वाडा ने ही एनडीटीएल की मान्यता ले ली थी।
खेलमंत्री ने दी बधाई
खेलमंत्री ने ट्वीट कर देशवासियों को इसके लिए बधाई दी और कहा- राष्ट्रीय डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी को विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी से फिर मान्यता मिली। इससे खेलों में उत्कृष्टता आएगी और साथ ही कई तरह के खेलों में भारत को अच्छा करने में सहायता मिलेगी। यह भारत सरकार के अथक प्रयासों का परिणाम है।
2008 में मिली थी मान्यता
एनडीटीएल के प्रयोगशाला को सबसे पहले 2008 में ही वाडा से मान्यता मिली थी। हालांकि, अगस्त 2019 के बाद से सैंपल्स की जांच भारत में रोक दी गई थी यानी प्रतिबंध लगा दिया गया था। तब राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) खून और मूत्र के नमूने एकत्र तो कर सकता था, लेकिन उसे भारत के बाहर वाडा की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच करानी होती थी।
भारत तीसरे नंबर पर
अब भारत में ही इसकी फिर से जांच हो सकेगी। इससे अनावश्यक खर्चे को रोका जा सकेगा। डोपिंग उल्लंघन के मामले में वाडा की वैश्विक सूची में भारत तीसरे नंबर पर है। वाडा की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2019 में डोपिंगरोधी नियमों के उल्लंघन के 152 मामले (विश्व के कुल मामलों का 17 प्रतिशत) पाए गए।
रूस पहले स्थान पर
भारत इस सूची में केवल रूस (167) और इटली (157) से पीछे है, जबकि ब्राजील (78) चौथे और ईरान (70) पांचवें स्थान पर है। अंतरराष्ट्रीय डोपिंग रोधी नियमों का पालन नहीं करने के कारण रूस टोक्यो ओलंपिक में अपनी राष्ट्रीय टीम को नहीं उतार पाया था और उसके खिलाड़ियों ने रूसी ओलंपिक समिति के तहत हिस्सा लिया था।