विंबलडन जूनियर सिंगल्स में सुमित नागल के पहले दौर का मुकाबला चार जुलाई को था। महज दो दिन पहले उन्हें लंदन के लिए वीजा मिला। तीन जुलाई को सुबह सवा सात बजे सुमित लंदन जाने को दिल्ली के एयरपोर्ट पर थे,लेकिन उन्हें फ्लाइट पर चढ़ने से रोक दिया गया।
एक एयरलाइंस ने उन्हें यह कहकर बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया कि वह नाबालिग हैं और बिना कोच के हवाई जहाज पर नहीं बैठ सकते हैं।
सुमित के परिजनों ने गुहार लगाई कि उसे कल विंबलडन में खेलना है,लेकिन एक नहीं सुनी गई। हारकर सुमित ने अपने जर्मनी के कोच मिरीनोव डेलफीनो से बात की।
कोच ने कहा जर्मनी का टिकट कराओ वह यहीं रुक रहे हैं। दोपहर बाद ऐसी विदेशी एयरलाइंस में उनका टिकट कराया गया जिसमें नाबालिग के नहीं जाने की प्रतिबद्धता नहीं थी।
जर्मनी में उन्होंने कोच को साथ लिया और मैच की सुबह चार जुलाई को लंदन पहुंचे, लेकिन इसकी उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। वह कड़े संघर्ष में पहले दौर का ही मुकाबला हार बैठे।