खेल मंत्रालय ने शनिवार को ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) को लगभग एक साल बाद मान्यता दी है। विवादित स्पोर्ट्स कोड के अनुपालन के कारण टेनिस बॉडी के नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के रूप में नवीनीकरण के कारण इसे रोक दिया गया था।
मंत्रालय ने गुरुवार को इस संबंध में एआईटीए को संवाद भेजा, जिसने इस वर्ष की शुरुआत में नया अध्यक्ष बनाया था। इससे पहले 2016 में अनिल खन्ना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
गैर-मान्यता के डर से एआईटीए ने पिछले साल 1 दिसंबर को अपनी कार्यकारी समिति बैठक में वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट प्रवीण महाजन को नया अध्यक्ष चुना था। हालांकि सरकार ने जोर दिया था कि एआईटीए को अच्छे से चुनाव कराने होंगे, इसलिए विशेष आम सभा (एसजीएम) 3 फरवरी को पुणे में आयोजित की गयी, जिसमें महाजन को साल 2020 तक के लिए अध्यक्ष पद पर चुना गया।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को कहा, 'हमने उनकी मान्यता दुविधा में रखी हुई थी। नए एआईटीए अध्यक्ष के चुनाव और वेरिफिकेशन बचे हुए थे। खन्ना के इस्तीफा दिया और महाजन को अध्यक्ष चुन लिया गया, लेकिन हमें देखना था कि सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी मिली है या नहीं।'
उन्होंने आगे कहा, 'वो नियमित वेरिफिकेशन प्रक्रिया थी। दस्तावेज मिलने के बाद इसे टालने का कोई कारण नहीं था। यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था की एआईटीए को गैर-मान्यताप्राप्त नहीं किया जाएगा।'
इसके अलावा खेल मंत्रालय ने कबड्डी कोच हीरा नंद कटारिया को द्रोणाचार्य अवॉर्ड देने की सिफारिश पर अभी रोक लगा दी है।
Sports Ministry gives recognition to All India Tennis Association (AITA)
— ANI (@ANI) August 26, 2017