भारतीय युवा टेनिस खिलाड़ी रामकुमार रामनाथन अपने पहले एटीपी वर्ल्ड टूर खिताब से एक कदम दूर हैं। चेन्नई के 23 वर्षीय रामकुमार ने अमेरिका के न्यूपोर्ट में स्थानीय खिलाड़ी टिम स्माइजेक को सीधे सेटों में मात देकर हॉफ ऑफ फेम ओपन टेनिस टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश कर लिया।
रामकुमार ने सेमीफाइनल में टिम को 6-4, 7-5 से पराजित किया। इसके साथ ही रामकुमार पिछले सात साल में एटीपी वर्ल्ड टूर के सिंगल्स फाइनल में जगह बनाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। इससे पहले सोमदेव देववर्मन 2011 में जोहानिसबर्ग में एटीपी वर्ल्ड टूर के फाइनल में पहुंचे थे। हालांकि उन्हें तब विंबलडन के मौजूदा उपविजेता दक्षिण अफ्रीका के केविन एंडरसन के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा था। दुनिया के 161वें नंबर के रामकुमार ने ग्रास कोर्ट के इस टूर्नामेंट में फाइनल तक के अपने सफर में सिर्फ एक सेट गंवाया।
स्टीव से होगा सामना
फाइनल में रामकुमार का सामना तीसरी वरीय अमेरिका के स्टीव जानसन से होगा, जिन्होंने मार्सेल को 6-3, 6-3 से पराजित किया। स्टीव की निगाह साल के दूसरे और कॅरिअर के चौथे खिताब पर होगी।
पेस के बीस साल बाद रामकुमार के पास मौका
रामकुमार अगर यह खिताब जीतने में सफल रहते हैं तो वह पिछले 20 वर्षों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय बनेंगे। उनसे से पहले 1998 में दिग्गज लिएंडर पेस ने 1998 में यह खिताब जीता था। रामकुमार के बचपन के हीरो पेस ने कॅरिअर में एकमात्र यही सिंगल्स ट्रॉफी जीती है। इसके अलावा विजय अमृतराज ने तीन बार (1976, 1980 व 1984) यह खिताब जीता है।
रामकुमार रामनाथन ने कहा, 'मैं अच्छी सर्विस कर रहा था और अच्छा खेल रहा था। पहला सेट मेरे लिए अच्छा नहीं रहा, लेकिन फिर मैंने लय पा ली। वह (स्माइजेक) ग्रास कोर्ट पर मजबूत प्रतिद्वंद्वी है। मैं उसे हराकर खुश हूं।'