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भारतीय टेनिस के आगे झुके रघुवीर

Tue, 05 Feb 2013 09:06 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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विंबलडन के कोर्ट पर चाहे मार्टीना नवरातिलोवा हों, क्रिस एवर्ट या फिर इवान लेंडल पगड़ी बांधे इस लाइन जज से बिना मिले मैच शुरू नहीं किया। लेकिन तुनकमिजाज जान मैकनरो हमेशा उनकी आंखों की किरकिरी रहे। उन्होंने तो इस शख्स को मैच से बाहर निकालने तक की मांग कर डाली। लेकिन जीत हमेशा कीनिया के रघुवीर सिंह महाजन की हुई।
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रघुवीर हैं तो कीनियाई और रहते लंदन में हैं लेकिन उनका दिल भारतीय टेनिस से जुड़ा है। हैरान नहीं होईएगा विंबलडन में अंपायरिंग से विदा लेने के बाद पिछले 12 सालों से वह भारत के प्रत्येक डेविस कप मुकाबले को अपनी जेब से देखने के लिए पहुंचते हैं।

इस बार का आरके खन्ना स्टेडियम पर कोरिया के खिलाफ डेविस कप मुकाबला भी इससे अछूता नहीं था। वह अपनी पत्नी के साथ यहां थे। उन्हें दुख था तो भारतीय टेनिस की दुर्दशा का। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आईटा और खिलाड़ियों को आपस में बैठकर मतभेद दूर करना चाहिए। महाजन कहते हैं कि वह भले कीनियाई हों लेकिन दिल भारतीय टेनिस के लिए धड़कता है। वह इसे फलते देखना चाहते हैं।
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सानिया ने विंबलडन जूनियर का डबल्स खिताब जीता तो वह उन्हीं के घर में रहीं। 1972 में उन्होंने नैरोबी से आकर विंबलडन में लाइन जज की भूमिका निभाई। वह बाद में चेयर अंपायर बने। मैकनरो से उनकी झड़पों ने उन्हें रातों रात चर्चित कर दिया। उनकी 29 साल की अंपायरिंग सेवाओं को देख ब्रिटिश महारानी ने उन्हें 2005 में मेंबर ऑफ ब्रिटिश एंपायर (एमबीई) से नवाजा। वह बताते हैं मैकनरो पीटर फ्लेमिंग के साथ आनंद व विजय अमृतराज के खिलाफ विंबलडन में डबल्स खेल रहे थे। उनकी एक सर्विस को उन्होंने बाहर करार दिया।

मैकनरो ने कहा वह एक भारतीय हैं और धोखेबाज हैं। महाजन का जवाब था वह भारतीय नहीं एक कीनियाई हैं। मैकनरो ने कहा आज तक किसी ने उन पर अंगुली नहीं उठाई। मैकनरों को इसके बाद जुर्माना झेलना पड़ा। इवान लेंडल के खिलाफ मैच में मैकनरो ने उन्हें बाहर करने की मांग की। लेंडल ने कहा महाजन नहीं होंगे तो वह मैच नहीं खेलेंगे। मैकनरो की यह मांग ठुकरा दी गई।
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