दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस खिताबी जीत के साथ रियो ओलंपिक में टिकट कटाने के बेहद करीब पहुंच गए है। पेस ने ऑस्ट्रेलियाई साथी सैम ग्रोथ के साथ जोड़ी बनाते हुए बुसान ओपन एटीपी चैलेंजर का खिताब जीत लिया है। फाइनल में उन्होंने थाई जोड़ी को हराया।
इस खिताबी जीत से उनकी एटीपी युगल रैंकिंग में 3 अंकों का फायदा हुआ और वह रैंकिंग में 54वें पायदान पर पहुंच गए हैं। इस साल होने वाले रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग करने के लिए खिलाड़ियों को शीर्ष 56 रैंकिंग के अंदर होना चाहिए। हालांकि हर देश की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के पास निचली रैंकिंग के खिलाड़ी के बारे में फैसला लेने का अधिकार है कि वो उसे खेलने के लिए भेजते हैं या नहीं।
रोहन बोपन्ना इस समय पुरुष युगल में भारत के शीर्ष खिलाड़ी हैं। उनकी वर्ल्ड रैंकिंग 13 है और सीधे एंट्री पाने के लिए उन्हें कट ऑफ तारीख (11 जून) से पहले तक अपनी रैंकिंग में सुधार लाते हुए शीर्ष 10 के अंदर लाना होगा।
नियम के अनुसार, सीधे एंट्री पाने पर खिलाड़ी अपनी पसंद के आधार पर साथी खिलाड़ी का चयन कर सकता है। भले ही उस खिलाड़ी की रैंकिंग कुछ भी हो। इस तरह से ओलंपिक में खेलने के अपार अनुभव को देखते हुए पेस बोपन्ना के स्वाभाविक पार्टनर बन सकते हैं। बोपन्ना उन्हें साझीदार के रूप में चुन सकते हैं। पेस एकमात्र भारतीय टेनिस खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में कोई पदक जीता है। वह 1992 से लगातार ओलंपिक में हिस्सा ले रहे हैं।
अगर बोपन्ना सीधे एंट्री पाने में नाकाम होते हैं तो भारत के पास एक और शानदार मौका होगा कि एक जोड़ी के रूप में सीधे एंट्री ली जाए। सीधे एंट्री के लिए जोड़ी को शीर्ष 60 खिलाड़ियों के अंदर की रैंकिंग में होना चाहिए।
पुरुष युगल में एंट्री लेने से भारत के पास मिश्रित युगल में भाग लेने का शानदार मौका होगा क्योंकि इसके बिना देश को मिश्रित युगल में एंट्री नहीं मिलेगी।