फ्रेंच ओपन चैंपियन लात्विया की जेलेना ओस्तापेंको ने विंबलडन चैंपियनशिप से पहले कहा कि उन्हें पहले लगता था कि घास का कोर्ट टेनिस खेलने के लिए नहीं बल्कि फुटबॉल के लिए सही होता है। फ्रेंच ओपन के फाइनल में रोमानिया की सिमोना हालेप को 4-6, 6-4, 6-3 से हराकर ओस्तापेंको पहली बार ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनी हैं। यह उनके कैरियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है। अब उनकी नजर वर्ष के तीसरे ग्रैंड स्लैम विंबलडन टेनिस खिताब पर है जहां वह 2014 में जूनियर चैंपियन रहीं थीं।
सेरेना विलियम्स को अपनी आइडल मानने वालीं ओस्तापेंको ने स्वीकार किया कि जब वह पहली बार ग्रास कोर्ट पर खेली थीं तो उन्हें बिलकुल भी पसंद नहीं आया था। उन्होंने कहा, ‘जब मैं पहली बार घास के टेनिस कोर्ट पर खेलने उतरी तो मुझे वह बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा। मुझे कुछ भी समझ नहीं आया था। मैं यही देख रही थी कि लोग इस पर टेनिस कैसे खेल लेते हैं। मुझे लगता था कि यह फुटबॉल के लिए ही होता है। फिर मैंने सीखा कि ग्रास कोर्ट पर कैसे खेला जाता है और मूवमेंट को समझा। अब मुझे यह काफी पसंद आता है और विंबलडन में भी खिताब जीतना चाहती हूं।’ लात्विया की ओस्तापेंको ने बताया कि वह 15 साल की उम्र में रोएहैंप्टन (इंग्लैंड) में ग्रास कोर्ट पर खेली थीं।
विंबलडन चैंपियनशिप शुरू होने से चार सप्ताह पहले ही ओस्तापेंको फ्रेंच ओपन जीतकर अचानक मशहूर हो गईं हैं। 20 वर्षीया ओस्तापेंको ने कहा, ‘प्रशंसकों का होना हर किसी को अच्छा लगता है। इससे दबाव जरूर बढ़ता है लेकिन खुद से दबाव हटाने की पूरी कोशिश करूंगी। जब मैं घर लौटूंगी तो लोग खास तवज्जो देंगे क्योंकि मैंने अपने देश के लिए इतिहास रच दिया है।’ ओस्तापेंको को रैँकिंग में भी फायदा होगा और वह 47वीं रैंकिंग से 12वें नंबर पर पहुंच जाएंगी।