पिछले उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद शटलर एचएस प्रणॉय ने कहा है कि वह दिल तोड़ने वाली हार के बाद नकारात्मकता से दूर रहना चाहते हैं। अब उनकी निगाह आने वाली विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में अच्छे नतीजों के लिए सीमित जोखिम उठाने पर हैं। मौजूदा सत्र में इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने कुछ तीन गेम तक चले रोमांचक मुकाबले खेले हैं। गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में सेमीफाइनल और कांस्य पदक के प्ले ऑफ दोनों ही मैचों में उन्हें तीन गेम तक जूझने के बाद हार झेलनी पड़ी थी।
प्रणॉय ने कहा कि उन्होंने इन अहम मुकाबलों में शिकस्त के बारे में सोचना बंद कर दिया है। इससे काफी नकारात्मकता आती है। अब उनका पूरा ध्यान संपूर्ण खेल पर है जहां उन्हें अपने शॉट खेलने होंगे, सीमित जोखिम उठाना होगा और पीछे नहीं हटना होगा। मुझे लगता है कि जब आप हारते हैं तो लोग ध्यान देते हैं, जब आप जोखिम लेकर जीतते हैं वे इस पर ध्यान नहीं देते। एबीसी (एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप) एक ऐसा टूर्नामेंट है जहां यह मेरे पक्ष में रहा और मैंने पदक जीता। लेकिन मुझे लगता है कि आपको प्रयास जारी रखना होता है।
एबीसी में कांस्य पदक जीतने के दौरान भी प्रणय ने कई तीन गेम के मैच खेले। इस दौरान प्री क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे के वैंग जू वेई और क्वार्टर फाइनल में दुनिया के पूर्व दूसरे नंबर के खिलाड़ी कोरिया के सोन वान हो को क्वार्टर फाइनल में हराया। प्रणॉय को अब 30 जुलाई से नानजिंग विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है और वह ड्रॉ से खुश हैं।