एकल का दूसरा क्वार्टरफाइनल भी आज ही खेला गया, जहां दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने कनाडा के मिलोस राओनिक को 6-4, 6-3, 7-6(1) से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। अब सेमीफाइनल में जोकोविच का मुकाबला फेडरर से होगा। दोनों 50वीं बार आमने-सामने होंगे। ऐसे में एक बार फिर दोनों दिग्गजों के बीच सेमीफाइनल में कांटे की जंग देखने को मिल सकती है। 15वीं बार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले फेडरर के लिए सातवीं बार इस टूर्नामेंट जीतना आसान नहीं होगा, क्योंकि वह टेनिस के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच में भी अनफिट नजर आ रहे थे।
सांस थाम देने वाले मैच में जीत के बाद जब फेडरर ने कहा कि मैं जादू में भरोसा करता हूं। हो सकता है मैं यह मैच न जीतता और दो दिन बाद स्विट्जरलैंड में स्की कर रहा होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मैं आज जीत गया। दरअसल, तीसरे सेट में 0-3 से पीछे होने के बाद फेडरर ने मेडिकल टीम से मदद ली थी। उन्हें ग्रोइन महसूस होने लगी थी और डिफेंस में असफल हो रहे थे, इसलिए उन्होंने एक्स्ट्रा ट्रीटमेंट लिया।
7 बार मैच पॉइंट बचाने वाले स्विटजरलैंड के इस खिलाड़ी ने खुद को भाग्यशाली भी बताया। बकौल रोजर, ‘कभी कभी मैच जीतने के लिए आपको लकी होना पड़ता है। 7 बार मैच पॉइंट की बराबरी करना आसान नहीं है। मैंने आज काफी अच्छी सर्विस की, खासकर मैच के अंत में। मैं अभी यहां खड़ा हूं यही सबसे खुशी की बात है।
अपना 21वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का सपना देख रहे फेडरर बड़े संघर्ष के बाद क्वार्टरफाइनल में पहुंचे थे। हंगरी के मार्टन फुकसोविक्स के खिलाफ पहला सेट गंवाने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की थी और 4-6, 6-1, 6-2, 6-2 से जीत दर्ज करके 57वीं बार ग्रैंडस्लैम क्वॉर्टर फाइनल में प्रवेश किया था। दूसरी ओर सैंडग्रेन ने इटली के 12वें वरीय फैबियो फोगनिनी को 7-6 (7/5), 7-5, 6-7 (2/7), 6-4 से पराजित किया था।
सैंडग्रीन को दूसरी बार क्वार्टरफाइनल में हार का सामना करना पड़ा। 28 वर्षीय सैंडग्रेन का नाम उनके परदादा के नाम पर रखा गया था। सैंग नाम से पुकारे जाने वाले टेनिस ने अपने परिवार के साथ पांच साल की उम्र में ही टेनिस रैकेट के साथ खेलना शुरू कर दिया था।
पिता की मौत के बाद वे टेनेसी विश्वविद्यालय में अपनी माँ और भाई के साथ खेलते थे। सैंडग्रीन अब तक किसी भी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में नहीं पहुंचे हैं। 2018 ऑस्ट्रेलिया ओपन में दक्षिण कोरिया के चूंग ह्यून के खिलाफ भी वह क्वार्टरफाइनल में हार गए थे।
दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी एशलघे बार्टी दो बार की विंबलडन चैंपियन पेत्रा क्वितोवा की चुनौती से पार पाकर पहली बार ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में पहुंच गई। अब फाइनल में जगह बनाने के लिए उनका सामना अमेरिका की सोफिया केनिन से होगा। ऑस्ट्रेलिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त बार्टी ने पहले सेट में जूझने के बाद चेक गणराज्य की सातवीं वरीय क्वितोवा को 7-6 (8/6), 6-2 से पराजित किया। सोफिया ने ट्यूनीशिया की ओंस जाबेर 6-4, 6-4 से हराकर पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के अंतिम चार में जगह बनाई। मॉस्को में जन्मी 21 वर्षीय केनिन ने पिछले दौर में अमेरिका की 15 वर्षीय कोको गॉफ को हराया था।
वेंडी के 36 साल बाद बार्टी : 23 वर्षीय बार्टी ने पिछले 36 वर्षों में यहां अंतिम चार में पहुंचने वाली पहली महिला खिलाड़ी हैं। उनसे पहले 1984 में वेंडी टर्नबुल ने यह उपलब्धि हासिल की थी। वह 1980 में फाइनल में भी पहुंची थी पर खिताब से चूक गई थीं। बार्टी अगर खिताब जीत जाती हैं तो वह 1978 में क्रिस ओ नील के बाद मेलबर्न में चैंपियन बनने वाली अपने देश की पहली महिला खिलाड़ी होंगी।