वीरेंद्र ने 190 किलो की नाल उठा जीता खिताब
चिरईगांव ब्लॉक में सौ वर्ष पुराने अखाड़े में मंगलवार को पारंपरिक खेलों में 60 पहलवानों ने दम दिखाया। ढाब क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोबरहां में नाल, जोड़ी और गदा की प्रतियोगिता हुई। चंदौली के कैलीं निवासी वीरेंद्र पांडेय कल्लू ने 190 किलो का नाल उठाकर विजेता का खिताब अपने नाम किया।
पिसौर, शिवपुर के शमशेर सिंह ने 40 किलो की जोड़ी को 38 हाथ फेरकर दम दिखाया। चांदपुर के भोदू यादव ने 67 किलो वजन की गदा 81 हाथ फेरकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। गोबरहा के पूर्व ग्राम प्रधान गुलाब यादव ने रेफरी की भूमिका निभाई। शुभारंभ विकास प्राधिकरण बोर्ड के सदस्य अंबरीश सिंह भोला ने किया। संचालन अश्विनी सिंह, धन्यवाद रामबाबू ने किया। रामधारी, अजीत, प्रभाकर, प्रमोद, मुन्ना रहे।
क्रिकेट खेलते खिलाड़ी।
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सूर्यांश की गेंद के सामने ढेर हुए विपक्षी
आदर्श फाउंडेशन पूर्वांचल क्रिकेट प्रतियोगिता जगतपुर इंटर कॉलेज मैदान पर हुई। लीग मुकाबले में कालीचरण क्रिकेट एकेडमी ने रामलाल क्रिकेट एकेडमी की टीम को 77 रन से हरा दिया। कालीचरण के सूर्यांश की गेंदों के सामने रामलाल के खिलाड़ी टिक नहीं सके। पहले बल्लेबाजी कर कालीचरण की टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 131 रन बनाए।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी रामलाल की पूरी टीम छह ओवर में 59 रन पर सिमट गई। संवादस्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदनवाराणसी। प्रदेश के तीन स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ, वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज गोरखपुर और मेजर ध्यान चंद स्पोटर्स कॉलेज सैफई में सत्र 2025-26 में 275 सीटें भरी जाएंगी। कक्षा 6, 7 और 8 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी विमला सिंह ने बताया कि खिलाड़ी sportscollegelko.in पर आवेदन शुल्क जमा करें।
टेबल टेनिस खिलाड़ी विवेकानंद सिंह।
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2 बार नेशनल और खेलो इंडिया में जीते पदक, अब जॉर्डन में खेलेंगे पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी विवेकानंद
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के एमएससी अंतिम वर्ष के छात्र विवेकानंद सिंह जॉर्डन के अम्मान में होने वाली अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता में खेलेंगे। दो बार नेशनल और खेलो इंडिया में कांस्य जीत चुके हैं। भारत में विवेकानंद की तीसरी रैंक है।
बिहार के भभुआ के अहीवास गांव विवेकानंद (26) बीएचयू से एमएससी (कृषि) में अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वह दिव्यांग हैं। हाथों और पैरों में ऑर्थोपेडिक बाधा के बाद भी खेल की दुनिया में शानदार मुकाम हासिल किया, जो कि कई सक्षम खिलाड़ियों के लिए आसान नहीं होता है।
अम्मान में अंतरराष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस टूर्नामेंट में वह भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आर्थिक परेशानियों और संसाधनों की कमी ने कई बार उनका रास्ता रोका, लेकिन हार नहीं मानी। किसी कॉर्पोरेट या संस्था से स्पॉंन्सरशिप नहीं मिलने पर खेल के जूनुन ने सफलता दिलाई। उनके पुराने स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय और अब बीएचयू के दोस्तों व सीनियर्स से मदद मिल रही है।
बीएचयू में सीनियर्स ने उन्हें टेबल टेनिस सिखाया। स्कूल के दौरान तो वह पैरा खेलों की हर स्पर्धा में हिस्सा लेते थे। बीएचयू में टेबल टेनिस को गंभीरता से लिया। विवेकानंद उन 11 खिलाड़ियों में शामिल हैं, जो भारत की ओर से जॉर्डन में प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। बीएचयू में 2020 से प्रोफेशनली खेलना शुरू किया।
फुटबाॅल कोच भैरव दत्त।
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15 दिन के लंदन दौरे पर हैं भैरव, तकनीकी सत्रों में सीख रहे बारीकियां
बरेका के खेल मैदान में खिलाड़ियों को फुटबॉल का प्रशिक्षण देने वाले भैरव दत्त लंदन के 15 दिन के दौरे पर हैं। भैरव वहां के फुटबॉल क्लबों की तकनीक सीखकर वाराणसी के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देंगे। भैरव ने बताया कि वह लंदन में खिलाड़ियों और कोच से मुलाकात कर रहे हैं। तकनीकी सत्रों में हिस्सा लेकर खेल की बारीकियां सीख रहे हैं।
भैरव दत्त ने अपनी मेहनत और लगन से बरेका से सटे पहाड़ी गांव को फुटबॉल का ब्राजील बना दिया है। फुटबॉल खिलाड़ी भैरव उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से बरेका में नौकरी करने आए थे। नौकरी के दौरान खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनके सिखाए फुटबॉलर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काशी का नाम रोशन कर रहे हैं।
फुटबॉल नर्सरी में छह साल में वह 130 खिलाड़ियों को प्रादेशिक और राष्ट्रीय प्रतियोगिता के योग्य बना चुके हैं। नर्सरी के खिलाड़ी अलग-अलग राज्यों से खेलते हैं। फिलहाल इनकी चार टीमें अलग-अलग राज्यों के टूर पर हैं। खेल कोटे से निकले यहां के कई खिलाड़ी स्कॉलरशिप पर पढ़ाई, एमफिल, बीएड और पीएचडी तक कर रहे हैं। सात लड़कियां बीएचयू और दो गुवाहाटी से रिसर्च कर रही हैं। तीन प्रोफेसर बन चुकी हैं जबकि सात को पंजाब में स्कॉलरशिप मिली है।
वाराणसी में खेल संस्कृति को बढ़ाना होगा
बताया कि लंदन में दस वर्ष की आयु में ही फिजियो टेस्ट और बॉडी मास इंडेक्स की जांच के बाद खिलाड़ी का खेल तय होता है। इसके अलावा वहां खेलों की संस्कृति बहुत समृद्ध है। दस साल की उम्र में ही तय हो जाता है कि खिलाड़ी किस खेल में आगे बढ़ेगा।
फुटबॉल में तकनीक और स्टेमिना जरूरी
भैरव ने बताया कि फुटबॉल में खिलाड़ी को एक से दूसरे गोलपोस्ट तक लगातार दौड़ लगानी होती है। इसमें स्टेमिना के साथ तकनीक महत्वपूर्ण है। इंजरी से बचना खिलाड़ियों के लिए चुनौती होती है। मैच में उतरने से पहले वॉर्मअप जरूरी है।