केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
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खेलो इंडिया मिशन पांच स्तंभों पर आधारित होगा
सीतारमण ने कहा, 'खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरियों के अनेक अवसर प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शुरू किए गए खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित पोषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।' सीतारमण ने कहा, 'खेलो इंडिया मिशन अगले दस वर्षों में खेल क्षेत्र को बदलने का काम करेगा। इसके तहत प्रतिभा विकास से लेकर ढांचे और तकनीक तक, हर स्तर पर एक समग्र व्यवस्था बनाई जाएगी।' उन्होंने बताया कि खेलो इंडिया मिशन को पांच प्रमुख चरणों में लागू किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक खिलाड़ियों को एक मजबूत और निरंतर विकास मार्ग मिल सके।
1. इंटीग्रेटेड टैलेंट डेवलपमेंट पाथवे
इस मिशन के तहत प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो तीन स्तरों पर काम करेंगे-
- फाउंडेशन लेवल (शुरुआती प्रतिभाओं के लिए)
- इंटरमीडिएट लेवल (उभरते खिलाड़ियों के लिए)
- एलीट लेवल (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए)
इस व्यवस्था से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान जल्दी होगी और उन्हें सही समय पर सही प्रशिक्षण मिल सकेगा।
2. कोच और सपोर्ट स्टाफ का व्यवस्थित विकास
सरकार ने माना है कि अच्छे खिलाड़ियों के पीछे अच्छे कोच और सपोर्ट स्टाफ सबसे बड़ी ताकत होते हैं। खेलो इंडिया मिशन के तहत कोच, फिटनेस ट्रेनर, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य सपोर्ट स्टाफ को सिस्टेमैटिक और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मार्गदर्शन मिल सके।
3. स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी का एकीकरण
आधुनिक खेल अब सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि डेटा, साइंस और टेक्नोलॉजी पर भी आधारित हैं। इस मिशन में स्पोर्ट्स साइंस, एनालिटिक्स, रिकवरी टेक्निक्स और नई तकनीकों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन और करियर दोनों सुरक्षित रह सकें।
4. प्रतियोगिताएं और लीग्स: खेल संस्कृति को बढ़ावा
खेलो इंडिया मिशन के तहत नियमित प्रतियोगिताएं और लीग्स आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मैच प्रैक्टिस, पहचान और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म देना है, ताकि भारत में एक मजबूत खेल संस्कृति विकसित हो सके।
5. खेल ढांचे का विकास
सरकार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए खेल ढांचे को विकसित करेगी। इसमें आधुनिक स्टेडियम, प्रशिक्षण सुविधाएं, हॉस्टल और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होंगे, जिससे खिलाड़ी देश में ही विश्वस्तरीय तैयारी कर सकें।