भारतीय मुक्केबाज एल सरिता देवी को अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ (आइबा) ने अस्थाई रूप से निलंबित कर दिया है।
आइबा ने उनके कोच गुरबख्श संधू, सागर दयाल और ब्लेक्स इग्लेसियास फर्नांडेज को भी अगली सूचना तक प्रतियोगितायों में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया है।
सरिता देवी ने इंचियोन एशियाई खेलों में महिलाओं के 60 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। लेकिन उन्होंने नतीजे का विरोध करते हुए पदक लेने से मना कर दिया था।
वह सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी पार्क जीना के हाथों विवादित तरीके से हार गई थीं।
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा था, ''मेरे दिल में जो दुख है, मैं उसे कोरिया में ही छोड़कर जाना चाहती हूं। मेरे साथ जो हुआ है, अच्छा नहीं हुआ है।'' उस समय आइबा के तकनीकी दल के डेविड फ्रांसिस ने कहा था, "सारी घटना सरिता और उसकी टीम की सोची-समझी योजना लगती है।"
क्या था मामला
इंचियोन एशियन गेम्स में सरिता देवी का महिलाओं के 57 से 60 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में मेजबान दक्षिण कोरिया की जि ना पार्क से मुकाबला था। मैच के दौरान सरिता का प्रदर्शन शानदार रहा और सभी उन्हें ही विजेता मान रह थे लेकिन बाउट खत्म होने के बाद रेफरी ने पार्क को विजेता घोषित कर दिया।
खुद के साथ हुए अन्याय के बाद सरिता देवी ने पदक वितरण समारोह के दौरान कांस्य पदक पहनने से इंकार कर दिया। बाद में सरिता ने कांस्य पदक अपने हाथ में लेने के बाद उसे रजत पदक जीतने वाली मुक्केबाज पार्क को सौंप दिया और वहां से चली गईं। पार्क ने कांस्य पदक वही पोडियम पर ही रख दिया जिसे बाद में एक वॉलिटियर्स ने उठाया।
सरिता का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण : माकन
पूर्व खेल मंत्री अजय माकन ने एआईबीए द्वारा महिला मुक्केबाज सरिता देवी के अस्थायी निलंबन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। माकन ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इंडियन बॉक्सिंग फेडरेशन, खेल मंत्रालय और इससे जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों को इस मामले को उच्च स्तर तक ले जाने की हिम्मत दिखानी चाहिए। सभी खेल संगठनों को भी इस मामले को भी काफी गंभीरता से लेनी चाहिए। मेरा तो यह मानना है कि पूरी मुक्केबाजी बिरादरी को सरिता देवी के साथ खड़ा होना चाहिए।"