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झंडा उठाने के साइना नेहवाल के इनकार ने मुश्किल में डाला

Fri, 19 Sep 2014 03:16 PM IST
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, दिल्ली
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ओलंपिक हो या एशियाई खेल, इन जैसे महाआयोजनों में ध्वजवाहक बनना अब तक शान की बात समझी जाती थी, लेकिन इंचियोन में शुक्रवार से शुरू होने जा रहे एशियाई खेलों के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल का ध्वजवाहक चयनित करने को लाले पड़ गए।
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हद तो तब हो गई जब बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल और पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली एथलीट सुधा सिंह ने यह सम्मानजनक जिम्मेदारी उठाने से मना कर दिया।

साइना के प्रशिक्षक विमल कुमार ने अगले दिन उनकी इवेंट होने का हवाला दिया जबकि सुधा के प्रशिक्षक निकोलाई स्नेसरेव ने प्रैक्टिस होने की बात कही। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में यह जिम्मेदारी उठाने से मना करने वाले अभिनव बिंद्रा के नाम पर चेफ डि मिशन आदिल सुमारीवाला ने जोखिम नहीं लिया। डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा और सानिया मिर्जा को इसके बाद वरीयता दी गई लेकिन दोनों ही अब तक यहां नहीं पहुंचे हैं।
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आनन-फानन में तय किया गया ध्वजवाहक का नाम

अब जब एशियाई गेम्स शुरू होने में चंद घंटे रह गए हैं, ऐसे में आनन-फानन में चेफ डि मिशन आदिल सुमारीवाला ने देर शाम सरदार सिंह के नाम की घोषणा की। सरदार सिंह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हैं।

सुमारीवाला साइना को ध्वजवाहक बनाना चाहते थे। उनके मना करने पर पीवी सिंधू का नाम भी चला, लेकिन कहा गया कि उन्होंने एशियाई खेलों में कोई पदक नहीं जीता है। दरअसल ध्वजवाहक के चयन को मचे बवाल का बड़ा कारण दिग्गज खिलाड़ियों का अब तक यहां नहीं पहुंचना है।

खेल मंत्रालय ने शर्त रखी है कि खिलाड़ी अपनी इवेंट से पांच दिन पहले ही जा सकते हैं। जिसके चलते पहलवान योगेश्वर दत्त, मुक्केबाज मैरीकॉम, डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा जैसे खिलाड़ी यहां आ नहीं सके और चेफ डि मिशन की मुश्किलें बढ़ती गईं।

हद तो तब हुई जब गेम्स विलेज में बृहस्पतिवार को ध्वजारोहण के दौरान कोई भी दिग्गज खिलाड़ी नहीं पहुंचा। महिला हॉकी टीम, फुटबॉल टीम के सहारे इसका आयोजन किया गया।

उद्घाटन समारोह में छोटा होगा भारतीय दल

अब तक एशियाई और कॉमनवेल्थ खेलों के उद्घाटन समारोह में भारी भरकम भारतीय दल देखा जाता था, लेकिन इस बार यह 130 से बड़ा नहीं होगा।

सच्चाई यह है कि आयोजकों ने समारोह में खिलाड़ियों की संख्या सीमित कर भारतीय दल की मुश्किलें कम कर दी हैं। सुमारीवाला की मानें तो 541 में से साढ़े तीन सौ खिलाड़ी इंचियोन पहुंच चुके हैं, लेकिन ज्यादातर ने अपने ट्रेनिंग और इवेंट का हवाला देकर इसमें भाग लेने से इंकार कर दिया है।

सुमारीवाला का कहना है कि उन्हें यही उम्मीद है कि समारोह में खिलाड़ियों की संख्या 130 से कम होगी।

गंगनम स्‍टार PSY भी बिखेरेंगे अपना जलवा

17वें एशियन गेम्स के उद्घाटन समारोह को अद्भुत बनाने के लिए इंचियोन डिजिटल तकनीक का सहारा लेगा। डिजिटल तकनीक के सहारे इंचियोन पूरी दुनिया को कोरिया का इतिहास और भविष्य से रुबरू कराने की तैयारी करने जा रहा है।

दक्षिण कोरिया के फिल्म डाइरेक्टर इम वोन तेक और जेंग जिन इन खेलों के ज्वाइंट डाइरेक्टर हैं। एक विज्ञप्ति जारी करते हुए उन्होंने बताया कि हम डिजिटल तकनीक के साथ कोरिया के इतिहास और भविष्य को कैरेक्टर्स और प्रतीकों के संयोजन से प्रदर्शित करेंगे।
 
तैयारियों पर एक नजर
62 हजार दर्शक उद्घाटन समारोह का उठाएंगे लुत्फ।
‘ड्रीम ऑफ 4.5 बिलियन पीपुल, वन एशिया’ इन खेलों का थीम सांग होगा।
एंटरटेनर किम सीओंग जू और येन सुन येओंग उद्घाटन समारोह के अलावा उद्घाटन समारोह को होस्ट करेंगे।
गंगनम स्टाइल सिंगर पीएसवाई और पियानोवादक लेंग लेंग भी बिखेरेंगे जलवा।
कोरियाई म्यूजिशियन गूगांक, परफॉर्मर एह सुक सियोन, गायक जो सुन मी, वायलनविद सोंग योंग हुन भी दर्शकों को करेंगे रोमांचित।
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भारतीय खिलाड़ी गेम्स के लिए तैयार

हाल ही में ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय एथलीटों से शुक्रवार से शुरू हो रहे 17वें एशियन गेम्स में भी शानदार प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

भारतीय एथलीटों से उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उसने 2010 गुंआझू एशियन गेम्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए छठवां स्थान हासिल किया था जो 1986 एशियन गेम्स (पांचवां स्थान) के बाद उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। भारत ने गुआंझू में कुल 65 पदक हासिल किए थे जिसमें 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य पदक थे।

वहीं, ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में उसने 15 गोल्ड मेडल के साथ कुल 64 पदक जीते थे। भारत को इन खेलों में एकबार फिर खेलों के पावरहाउस देश चीन, जापान और मेजबान दक्षिण कोरिया से कड़ी चुनौती मिलेगी। इन तीनों देशों का गोल्ड मेडल जीतने का आंकड़ा ही कम से कम 50 होता है। भारत के लिए शीर्ष तीन में जगह बनाना तो मुश्किल है। ऐसे में उसकी निगाहें चौथे और पांचवें स्थान पर होगी।

भारत एशियाई खेलों के इतिहास में सिर्फ दो बार शीर्ष तीन में जगह बना पाया है। एशियाई खेलों में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1951 और 1962 में रहा जब वह क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहा। 1951 में भारत ने प्रथम एशियाई खेलों की मेजबानी की और 15 गोल्ड के साथ कुल 51 पदक जीते। वहीं 1962 में भारत 10 गोल्ड के साथ कुल 33 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहा था।
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