आईबा और खेल मंत्रालय ने बॉक्सिंग पर प्रतिबंध जरूर लगा रखा है लेकिन साई इस खेल के साथ किसी तरह कोताही नहीं बरतने जा रही है। एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए साई ने इस खेल का वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए बजट लगभग दोगुना कर दिया है।
ठीक ऐसा ही उसने आर्चरी के साथ किया है। शूटिंग को भी दो ओलंपिक पदक दिलाने का ईनाम मिला है। इस खेल को साढ़े 11 करोड़ के मुकाबले सर्वाधिक 20 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। 2012-13 में 5.94 करोड़ का बजट रखने वाली हॉकी को अगले वर्ष साढ़े 10 करोड़ दिए जाएंगे।
हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरिंदर बत्रा ने इस पर चिंता भी जताई है। हॉकी पर वास्तविक खर्च 11.77 करोड़ रुपये का आया है लेकिन साई ने उसके लिए निर्धारित मूल बजट को ध्यान में रखकर अगले वित्तीय वर्ष के बजट का निर्धारण किया है।
सूत्रों की मानें तो साई ने आर्चरी, एथलेटिक्स, हॉकी, शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, जूडो, ताईक्वांडो, कुश्ती को प्रमुखता सूची में रखते हुए इनका बजट 75 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ाया है। जबकि जिम्नास्टिक, गोल्फ, कबड्डी, रोइंग, सेलिंग, स्क्वैश, तैराकी, लॉन टेनिस व वूशु का बजट 33 प्रतिशत बढ़ाया गया है। पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने वाले खेल बिलियर्ड्स, स्नूकर का बजट पिछले वर्ष के मुकाबले 94 लाख ही रखा गया है। टेबल टेनिस, वॉलीबाल, शतरंज को भी इसी श्रेणी में डाला गया है।
आर्चरी को साढ़े पांच के मुकाबले दस करोड़, एथलेटिक्स को साढ़े छह के मुकाबले साढ़े 11 करोड़, बैडमिंटन को सात के मुकाबले 12 करोड़, बॉक्सिंग को साढ़े 10 के मुकाबले साढ़े 18 करोड़, जूडो व ताईक्वांडो को दो के मुकाबले साढ़े तीन करोड़, वेटलिफ्टिंग को चार के मुकाबले सात करोड़, कुश्ती को सात के मुकाबले 13 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यही नहीं साई इस बार पिछली बार के सवा सौ करोड़ के मुकाबले इन खेलों पर 155 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है।
हालांकि पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने वाले खेल टेनिस व रोइंग को 75 प्रतिशत बढ़ोतरी की प्रमुखता सूची से बाहर किया जाना हैरानीजनक है। जिस तरह से शूटिंग का बजट दोगुना किया गया है। मैं आशा करता हूं कि राष्ट्रीय खेल हॉकी को भी इसी तरह की मदद पहले की तरह अब भी जारी रहेगी।-नरिंदर बत्रा सेक्रेटरी जनरल हॉकी इंडिया