क्या कोई महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का भी अपमान कर सकता है? हालांकि इस बात पर विश्वास नहीं होता लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की एक हरकत से सचिन ने काफी अपमानित महसूस किया था। खुद सचिन ने इस बात का खुलासा अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माइ वे’ में किया है।
यह 1997 का दौर था जब सचिन टीम इंडिया के कप्तान थे और टीम को लगातार हार का सामना करना पड़ा रहा था। सचिन ने श्रीलंका के खिलाफ 3 मैचों की ड्रॉ हुई उस सीरीज को याद किया जिसके बाद उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया था।
41 वर्षीय इस महान बल्लेबाज ने लिखा है, "इस सीरीज के खत्म होने के बाद मुझे अनौपचारिक तरीके से कप्तानी से हटा दिया गया। बीसीसीआई की तरफ से मुझे किसी ने फोन करने या कप्तानी से हटाए जाने की सूचना देना जरूरी नहीं समझा। मुझे मीडिया में से किसी ने बताया कि मैं अब कप्तान नहीं रहा। उस समय मैं साहित्य सहवास में अपने दोस्तों के साथ था। यह सुनकर मैंने काफी अपमानित महसूस किया लेकिन मैंने जिस तरह से पूरी चीजों को संभाला उसने मुझे आने वाले सालों में एक बेहतर क्रिकेटर बनने के मेरे संकल्प को मजबूत बनाया। मैंने खुद से कहा कि बीसीसीआई के आका मुझसे कप्तानी छीन सकते हैं लेकिन जहां तक मेरी क्रिकेट का सवाल है तो ऐसा कोई नहीं कर सकता।"
बांग्लादेश बोर्ड के अध्यक्ष पर चिल्ला पडे़ थे सचिन
सचिन ने कहा कि उन्होंने भले ही और बेहतर करने की कसम खाई थी लेकिन उस अपमान की तकलीफ उन्हें आज तक है। सचिन ने लिखा है, "कप्तानी के समय कुछ खिलाड़ी मुझे स्किप कहकर बुलाते थे इसलिए जब ढाका अगले टूर्नामेंट के दौरान जब एक खिलाड़ी ‘स्किपर’ चिल्लाया तो आदत के अनुसार मैं जवाब देने के लिए मुड़ गया। तब मुझे वास्तव में काफी बुरा लगा कि मैं अब भारतीय टीम का कप्तान नहीं हूं। अब मुझे सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान देना था और अपनी टीम को मैच जिताने थे, इसलिए मैंने यही किया।"
कप्तानी छिनने के बाद सचिन तेंदुलकर अपनी बल्लेबाजी पर इतना ज्यादा ध्यान देने लगे थे कि एक मैच के दौरान वह बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अशरफुल हक पर चिल्ला पड़े थे।
सचिन ने लिखा है, "मैं अपनी बल्लेबाजी पर इतना ध्यान दे रहा था कि बांग्लादेश में एक मैच के दौरान साइट स्क्रीन पर हो रही हरकत के कारण जब मेरी एकाग्रता भंग होने से मैंने अपना विकेट गंवाया तो पवेलियन लौटने समय मैं किसी पर चिल्लाया था। वह बांग्लादेश बोर्ड के अध्यक्ष थे।"
उन्होंने आगे लिखा कि यह घटना जिससे हम दोनों को शर्मिंदगी हुई वह 1998 में ढाका में हुआ सिल्वर जुबली इंडिपेंडेस कप के 3 में से दूसरा फाइनल था। हालांकि बाद में हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए।
कपिल देव ने किया सचिन को निराश
सचिन तेंदुलकर ने अपनी आत्मकथा में महान ऑलराउंडर कपिल देव के बारे में लिखते हुए कहा कि बतौर टीम इंडिया के कोच उन्होंने काफी निराश किया।
सचिन ने लिखा, "जब मैं दूसरी बार कप्तान बना तब भारतीय टीम के कोच विश्व के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर में से एक कपिल देव थे। नवंबर 1999 को हम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए और इस हाई-प्रोफाइल सीरीज में मुझे कपिल से काफी उम्मीदें थी। मैंने हमेशा कहा है कि कोच का काम काफी जिम्मेदारी का होता है। वह इस पोजिशन में थे जहां वह टीम की रणनीति बनाने में अहम भूमिका अदा कर सकते थे।"
उन्होंने आगे लिखा, "ऑस्ट्रेलिया जैसे कठिन दौरे में कपिल से बेहतर और कौन हो सकता था? वहीं कपिल की सोच अलग थी और उनका मानना था कि रणनीति बनाने में कप्तान की भूमिका ही होनी चाहिए। उन्होंने टीम के लिए रणनीति बनाने से खुद को दूर रखा जिससे हमें मैदान पर मदद मिलती।"
द्रविड़ से नाराज हो गए थे तेंदुलकर
पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट मैच में जब सचिन तेंदुलकर 194 रन पर खेल रहे थे, तब कप्तान राहुल द्रविड़ द्वारा पारी की घोषणा करने से यह महान बल्लेबाजी काफी खफा हो गया था।
सचिन ने अपनी किताब में लिखा है, "मैं द्रविड़ के फैसले से काफी हैरान और दुखी था। मैंने द्रविड़ से कहा कि यह फैसला मैदान पर मुझे प्रभावित नहीं करेगा लेकिन मैदान से बाहर मैं कुछ समय के लिए अकेला रहना चाहूंगा।"
हालांकि सचिन ने कहा कि इस फैसले का असर द्रविड़ के साथ उनकी दोस्ती पर नहीं पड़ा।