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Who is Rishikanta Singh: ऋषिकांता ने ग्लास्गो CWG में जीता रजत पदक, आखिरी दो प्रयासों में टूटा स्वर्ण का सपना

Sun, 26 Jul 2026 04:39 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के ऋषिकांता सिंह ने पुरुषों के 60 किग्रा भार वर्ग में रजत पदक जीतकर देश का दूसरा पदक दिलाया। क्लीन एंड जर्क के आखिरी दो प्रयास असफल रहने के बावजूद उन्होंने कुल 264 किलो वजन उठाकर पोडियम पर जगह बनाई। 
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ऋषिकांता सिंह - फोटो : IANS
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विस्तार
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कई बार खेल सिर्फ जीत का नाम नहीं होता, बल्कि आखिरी कोशिश तक हार न मानने का दूसरा नाम होता है। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह ने यही जज्बा दिखाया। क्लीन एंड जर्क में लगातार दो प्रयास असफल रहे, सोने का सपना हाथ से फिसल गया, लेकिन चेहरे पर निराशा से ज्यादा संतोष था। वजह थी- भारत की झोली में राष्ट्रमंडल खेलों का दूसरा पदक आ चुका था। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में ऋषिकांता ने रजत पदक जीतकर एक बार फिर साबित किया कि बड़े खिलाड़ी वही होते हैं, जो दबाव में भी देश का सिर ऊंचा कर दें।

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बाएं से- रजत पदक के साथ ऋषिकांता, स्वर्ण पदक के साथ अनिक और कांस्य के साथ मबोया

ऋषिकांता सिंह

ऋषिकांता सिंह - फोटो : IANS

दो असफल प्रयास, फिर भी पोडियम पर तिरंगा
 

  • मणिपुर के इस युवा भारोत्तोलक ने स्नैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने पहले प्रयास में 143 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाया।
  • स्वर्ण पदक की दौड़ में बने रहने के लिए दूसरे प्रयास में उन्होंने 148 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 151 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उनका कुल वजन 264 किलोग्राम (121+143) रहा, जिसने उन्हें रजत पदक दिला दिया।
  • मलयेशिया के मोहम्मद अनिक ने स्नैच में 121 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 152 किलोग्राम उठाकर कुल 273 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वजन- तीनों में राष्ट्रमंडल खेलों के नए रिकॉर्ड भी बनाए।
  • भारत के लिए यह ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों का दूसरा पदक रहा। इससे पहले पैरा पावरलिफ्टिंग में झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था।

मोहम्मद अनिक - फोटो : IANS

मणिपुर की मिट्टी से निकला एक और सितारा
 

  • भारोत्तोलन की बात हो और मणिपुर का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है। मीराबाई चानू जैसी दिग्गज खिलाड़ी देने वाली इस धरती ने ऋषिकांता सिंह के रूप में एक और सितारा तैयार किया।
  • इंफाल वेस्ट के रहने वाले ऋषिकांता बचपन से ही भारोत्तोलन की ओर आकर्षित थे। प्रतिभा तो थी, लेकिन उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत थी।
  • यह मौका उन्हें भारतीय सेना के खेल ढांचे में मिला, जहां अनुशासन, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतरीन सुविधाओं ने उनके खेल को नई दिशा दी।

ऋषिकांता सिंह - फोटो : IANS

रिकॉर्ड तोड़ते हुए पहुंचे राष्ट्रमंडल खेलों तक
 

  • ऋषिकांता ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में 55 किलोग्राम वर्ग से अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने वजन वर्ग बदला और 60/61 किलोग्राम वर्ग में खुद को स्थापित किया।
  • 2024 राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने 61 किलोग्राम वर्ग के स्नैच में 124 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया।
  • इसके बाद 2025 राष्ट्रमंडल भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने 120 किलोग्राम स्नैच, 151 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क और कुल 271 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
  • यह कुल वजन भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना और इसी प्रदर्शन ने उन्हें लगातार दूसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों का टिकट दिलाया।
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ऋषिकांता सिंह - फोटो : IANS
रजत, जो स्वर्ण से कम नहीं
ग्लास्गो में भले ही स्वर्ण पदक उनसे दूर रह गया, लेकिन यह रजत उनके संघर्ष, निरंतर मेहनत और जज्बे की चमक है। आखिरी दो प्रयासों में असफल होने के बाद भी उन्होंने खुद को बिखरने नहीं दिया और पोडियम पर तिरंगे को जगह दिलाई।

यह पदक सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सफर की कहानी है, जिसमें मणिपुर का एक युवा भारतीय सेना की मदद से देश के सबसे भरोसेमंद भारोत्तोलकों में शामिल हुआ। अब नजरें एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर होंगी, जहां ऋषिकांता सिंह भारत के लिए और बड़े सपने पूरे करने का दम रखते हैं।

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