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नतीजा सिफर पर अनुबंध इनाम के साथ

Wed, 12 Dec 2012 11:23 PM IST
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
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जंप हो या स्प्रिंट, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलीट लंबे समय से कोई करिश्मा दिखाने में विफल रहे हैं। बावजूद इसके इन्हें ट्रेनिंग देने वाले विदेशी प्रशिक्षक अभी भी एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) के चहेते बने हैं।
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एएफआई ने भारतीय टीम के साथ लंबे समय से जमे हुए चार विदेशी प्रशिक्षकों और दो सपोर्ट स्टाफ को एशियाई खेलों तक बढ़े हुए वेतन के साथ अनुबंधित करने का प्रस्ताव साई को सौंपा है। साई ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। लंदन ओलंपिक में ट्रिपल जंपर रंजीत महेश्वरी की तीनों फाउल जंप का रहस्य अब तक जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। लेकिन इस अनुभवी जंपर को पिछले कई सालों से ट्रेनिंग दे रहे इतालवी बुजुर्ग कोच एवगेनी शिवली पर एएफआई का भरोसा बरकरार है।

छह दिसंबर को खेल मंत्रालय और साई अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एएफआई ने शिवली के अलावा स्प्रिंट और हर्डल कोच अनातोली वार्डा, वॉक कोच अलेक्जेंडर आर्टिसीबाशेव तथा हाई जंप कोच एवगेनी निकितिन के अलावा मैस्योर दिमित्री बुलडोव और उनकी पत्नी मैस्यूजी एलीना बुलडोवा 10 प्रतिशत बढ़े हुए वेतन के साथ 31 अक्तूबर 2014 तक अनुबंधित करने का प्रस्ताव दिया है। एएफआई का तर्क है कि इन सभी एथलीटों के प्रदर्शन में इनका जबरदस्त योगदान रहा है जबकि असलियत इसके उलट है।
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निकितिन के अंडर में ट्रेनिंग करने वाली हाई जंपर सहाना कुमारी लंदन में कुछ खास नहीं कर सकीं। एशियाई खेलों में भी वह फिसड्डी रहीं। वार्डा के अंडर में ट्रेनिंग करने वाला एक भी हर्डलर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका। हालांकि वॉकरों का प्रदर्शन सराहनीय रहा लेकिन इसका श्रेय अलेक्जेंडर को नहीं बल्कि भारतीय प्रशिक्षकों पीके गांधी और गुरदेव सिंह को जाता है। अलेक्जेंडर लंदन ओलंपिक से कुछ समय पहले ही टीम के साथ जुड़े थे।

इन चारों का ही वेतन चार हजार से बढ़ाकर तकरीबन पांच हजार अमेरिकी डॉलर करने का प्रस्ताव दिया गया है। एएफआई के इस प्रस्ताव पर फेडरेशन के ही अधिकारियों में एक राय नहीं है। ये सभी इस वक्त पटियाला में एथलीटों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। सभी का अनुबंध 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
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