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President Murmu: शतरंज में भारत के दबदबे को राष्ट्रपति मुर्मू ने सराहा, देश के नाम संबोधन में किया जिक्र

Thu, 14 Aug 2025 08:08 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद शतरंज में भारत के दबदबे का जिक्र किया और इसकी प्रशंसा की।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : President of India X Account
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद शतरंज में भारत के दबदबे का जिक्र किया और इसकी प्रशंसा की। मुर्मू ने कहा कि देश खेल के क्षेत्र में बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 18 साल के भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश विश्व चैंपियन बनने वाले युवा खिलाड़ी बने थे। इतना ही नहीं, शतरंज में उनके अलावा आर प्रज्ञानंद, अर्जुन एरिगेसी, विदित गुजराती, कोनेरु हम्पी, दिव्या देशमुख और आर वैशाली ने भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। 

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राष्ट्रपति ने दिव्या-हम्पी के बीच खिताबी मैच का किया जिक्र
दिव्या देशमुख ने पिछले महीने महिला विश्व कप में हम्पी को हराकर खिताब जीता था और वह महिला शतरंज विश्व कप जीतने वाली युवा खिलाड़ी बनी थी। मुर्मू ने अपने संबोधन के दौरान कहा, विश्व शतरंज चैंपियनशिप के लिए फिडे महिला विश्व कप का फाइनल मैच 19 वर्ष की भारत की एक बेटी और 38 साल की एक भारतीय महिला के बीच खेला गया। यह उपलब्धि पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारी महिलाओं में विद्यमान, विश्व स्तर की सतत उत्कृष्टता को रेखांकित करती है। 

मुर्मू ने शतरंज का दिया उदाहरण
राष्ट्रपति ने कहा, नए आत्मविश्वास से लबरेज हमारे युवा खेलों में अपनी पहचान बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, शतरंज में अब भारत के युवाओं का दबदबा पहले से कहीं ज्यादा है। हम ऐसे परिवर्तनकारी बदलावों की आशा करते हैं जो राष्ट्रीय खेल नीति 2025 में निहित दृष्टिकोण के तहत भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेंगे। हमारी बेटियां हमारा गौरव हैं। वे रक्षा और सुरक्षा सहित हर क्षेत्र में बाधाओं को पार कर रही हैं। खेल उत्कृष्टता, सशक्तिकरण और क्षमता के महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक हैं।

मुर्मू ने कहा, यह हमारी महिलाओं में पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतर और विश्व स्तर पर तुलनीय उत्कृष्टता को रेखांकित करता है। रोजगार में लैंगिक अंतर भी कम हो रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के साथ, महिला सशक्तिकरण अब एक नारा नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है।
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राष्ट्रीय खेल नीति प्रशासकों की जवाबदेही और खेल क्षेत्र में नैतिक प्रथाओं, निष्पक्ष खेल और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं की स्थापना का आह्वान करती है। इसमें राष्ट्रीय एजेंसियों और अंतर-मंत्रालय समितियों के गठन का भी प्रस्ताव है जिससे कि त्वरित कार्रवाई और मुद्दों के प्रभावी समाधान को सुगम बनाया जा सके और खेल पारिस्थितिकी तंत्र में पारदर्शिता तथा निर्बाध संचालन को बढ़ावा मिले।
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